आंधी ने छीनीं संतोष के घर की खुशियां: इकलौती लाडली अनामिका और भाई विशेष की मौत, गांव में नहीं जले चूल्हे
झोपड़ी पर ट्रांसफार्मर गिरने से सगे भाई-बहन की मौत, नम आंखों से दी विदाई, गम में डूबा जमालपुर
बदायूं| दातागंज तहसील क्षेत्र के हजरतपुर थाना अंतर्गत जमालपुर गांव में सोमवार शाम आई तेज आंधी-तूफान ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है।आंधी के दौरान खेत पर बनी झोपड़ी पर भारी-भरकम बिजली का खंभों सहित ट्रांसफार्मर गिरने से सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत हो गई।मंगलवार को जब दोनों मासूमों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया।गमगीन माहौल में दोनों बच्चों को अंतिम विदाई दी गई, जिसके शोक में पूरे गांव के चूल्हे तक नहीं जले।
बारिश से बचने के लिए झोपड़ी में छिपे थे मासूम:-मिली जानकारी के अनुसार, जमालपुर निवासी किसान संतोष राठौर के बच्चे खेत पर थे।सोमवार शाम अचानक आए भीषण आंधी-तूफान और तेज बारिश से बचने के लिए ११ वर्षीय बेटा विशेष और उसकी छोटी बहन अनामिका खेत में बनी झोपड़ी के नीचे छिप गए।इसी दौरान तेज हवा के थपेड़ों से पास ही लगा हाई-वोल्टेज बिजली का पोल और भारी ट्रांसफार्मर उखड़कर सीधे झोपड़ी पर जा गिरा।मलबे और भारी मशीनरी के नीचे दबने से दोनों भाई-बहन के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिससे मौके पर ही उनकी सांसें थम गईं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर की चोट बनी मौत का कारण:-घटना के बाद आनन-फानन में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।मंगलवार तड़के ४ बजे आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि दोनों बच्चों की मौत सिर में लगी अत्यधिक गंभीर और घातक चोटों के कारण हुई। सुबह शव परिजनों को सौंप दिए गए।
इकलौती लाडली की मौत से टूटा परिवार, गांव में नहीं जला चूल्हा:-ग्रामीणों ने बताया कि संतोष राठौर के छह बच्चों में पांच बेटे और अनामिका इकलौती बेटी थी।पूरे घर की लाडली होने के कारण अनामिका से सबको बेहद लगाव था।सुबह जब दोनों बच्चों के शव संतोष के घर पहुंचे,तो मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।सांत्वना देने के लिए जमालपुर समेत आसपास के गांवों (बक्सेना और धुबरी) से सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष संतोष के घर उमड़ पड़े।इस हृदयविदारक हादसे के दुख में पूरे मोहल्ले के अधिकांश घरों में मंगलवार को चूल्हा तक नहीं जला।
भाई के आने पर शाम को हुआ अंतिम संस्कार:-संतोष का तीसरे नंबर का बेटा जयंत बाहर रहकर नौकरी करता है।हादसे की खबर मिलते ही वह गांव के लिए रवाना हुआ।शाम करीब 5 बजे के बाद जब जयंत घर पहुंचा,तब जाकर गमगीन माहौल में दोनों भाई-बहन का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।रिपोर्ट: जयकिशन सैनी

