काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में प्रकृति ने एक बार फिर भयानक तबाही मचाई है। तिब्बत सीमा से लगे उत्तरी नेपाल के रसुवा और सिंधुपालचोक जिलों में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने (Flash Flood) से सब कुछ तहस-नहस हो गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि मकान, गाड़ियां और भारी-भरकम पुल ताश के पत्तों की तरह बह गए।
तबाही का खौफनाक मंजर: सैकड़ों यात्री और जवान लापता
बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियों में बरपाया है। आपदा के जो प्रारंभिक आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं:
यात्रियों पर कहर: पर्यटन विभाग के अनुसार 384 यात्री लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय, 93 नेपाली और बाकी अन्य विदेशी नागरिक शामिल हैं।
कैजुअल्टी: अब तक 17 लोगों की मौत की आशंका जताई गई है, जिनमें से 7 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं।
सुरक्षाकर्मी भी संपर्क से बाहर: नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 4, नेपाल पुलिस के 32 और रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 जवान बाढ़ के बाद से लापता हैं।
बुनियादी ढांचे और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान
अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से अचानक नीचे आया। इस जलप्रलय में नेपाल के बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुंची है।
बिजली परियोजनाएं ठप: स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, बाढ़ से 15 हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं (इनमें 10 चालू और 5 निर्माणाधीन थीं)।
अरबों का नुकसान: रसुवा सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई व्यावसायिक वाहन और सामान बह गए। एक नवनिर्मित पुल भी पूरी तरह नष्ट हो गया है।
PM मोदी ने जाना हाल, नेपाल में हाई-लेवल मीटिंग
त्रासदी की गंभीरता को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को फोन कर हालात की जानकारी ली। वहीं, नेपाल के पीएम ने सिंह दरबार में एक उच्चस्तरीय आपात बैठक की। उन्होंने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और हाई अलर्ट जारी करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
WHO की मदद और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन
आपदा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी पहुंचनी शुरू हो गई है:
स्वास्थ्य सुविधाएं: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 1000 लोगों के लिए जरूरी दवाएं, स्वास्थ्य उपकरण और 15 इमरजेंसी टेंट भेजे हैं। गंभीर मरीजों के लिए काठमांडू के बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में 100 बेड आरक्षित किए गए हैं।
रेस्क्यू मिशन: नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस और स्थानीय पुलिस की टीमें 14 हेलिकॉप्टरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। अब तक दर्जनों लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला जा चुका है।
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