Holi 2025 : मुख्यमंत्री आवास में आयोजित होली मिलन समारोह में केवल अबीर-गुलाल ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विविध लोक संस्कृतियों की छटा भी देखने को मिली। राठ क्षेत्र की सांस्कृतिक टोली, थारू जनजाति के छोलिया नृत्य और जौनसार के हारूल नृत्य ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। महिला कलाकारों ने पारंपरिक होली गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल पूरी तरह होली के रंग में रंग गया।
Holi 2025: मुख्यमंत्री धामी लोक कलाकारों के संग झूमे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस सांस्कृतिक उत्सव में पूरी तरह शामिल दिखे। उन्होंने ढोल, थाली और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर कलाकारों के साथ नृत्य किया और होली का आनंद लिया। उनकी पत्नी गीता धामी भी इस अवसर पर मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी मेहमानों का तिलक कर स्वागत किया और होली की शुभकामनाएं दीं।
Holi 2025: प्रेम, एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक
सीएम धामी ने अपने संबोधन में कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार हमें सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है और समाज में समरसता को मजबूत करता है। उन्होंने लोगों से इस पर्व को सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की।
Holi 2025: सांस्कृतिक विरासत को पहचान दिलाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और प्रदेशभर से आए गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने पारंपरिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

