माणा/देहरादून डेस्क: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के प्रथम सीमांत गांव ‘माणा’ (Mana Village) का भ्रमण कर स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं से सीधा और आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर और अपने द्वारा तैयार किए गए स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए महिलाओं का आभार जताते हुए उनकी संस्कृति की जमकर सराहना की।
उत्तराखंड का पहला 100% ‘लखपति दीदी’ गांव बना माणा
ग्राम पंचायत माणा आज स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और राज्य सरकार की “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है:
शत-प्रतिशत सफलता: माणा गांव में 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हैं। खास बात यह है कि यहां की सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का पहला शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है।
स्वरोजगार से संवर रही आजीविका: गांव की महिलाएं ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर, टोकरी निर्माण, दाल, कालीन, पापड़, मसाले और होमस्टे जैसे विविध कार्यों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इन स्थानीय उत्पादों को ‘सरस मॉल’ और स्टॉलों के जरिए बड़ा बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
श्रद्धालुओं से की ‘लोकल फॉर वोकल’ की अपील
मुख्यमंत्री ने गांव की इन “लखपति दीदियों” से मुलाकात कर उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। सीएम धामी ने चारधाम यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं से एक विशेष अपील करते हुए कहा:
प्लास्टिक मुक्त यात्रा: चारधाम यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित, सुखद और प्लास्टिक मुक्त (हरित यात्रा) बनाने में सभी अपना सहयोग दें और पर्यावरण का संरक्षण करें।
स्थानीय उत्पाद खरीदें: श्रद्धालु यात्रा के दौरान महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की ज्यादा से ज्यादा खरीद करें, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सके।
‘अंतिम’ नहीं, अब ‘प्रथम गांव’ के रूप में हो रहा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सीमांत गांवों की तस्वीर बदल रही है।
जो गांव पहले देश के “अंतिम गांव” कहे जाते थे, उन्हें अब “प्रथम गांव” का दर्जा देकर उनका समग्र विकास किया जा रहा है।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत माणा सहित प्रदेश के तमाम सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट) का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे पर्यटन, रोजगार और आजीविका के नए द्वार खुल रहे हैं।

