नई दिल्ली। Foreign Ministry : भारत ने गुरुवार को कहा कि वह तुर्की से अपेक्षा करता है कि वह पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन न देने का दबाव बनाए और दशकों से पाकिस्तान समर्थित आतंक को खत्म करने में अपनी भूमिका निभाए।
पाकिस्तान आज भी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह- Foreign Ministry
Foreign Ministry के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि तुर्की पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन बंद करने और दशकों से उसके द्वारा पोषित आतंकी गतिविधियों के खिलाफ विश्वसनीय कार्रवाई करने का आग्रह करेगा। किसी भी दो देशों के बीच संबंध एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर बनाए जाते हैं।”
तुर्की ने राष्ट्रपति एर्दोगन के नेतृत्व में पाकिस्तान की भारत के प्रति सैन्य आक्रामकता का समर्थन किया है। पिछले सप्ताह तुर्की के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में नौ हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करने वाली सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी।
यह आदेश तुर्की द्वारा इस्लामाबाद का समर्थन करने और 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या का बदला लेने के लिए शुरू किए गए भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की निंदा करने के कुछ दिन बाद लिया गया। भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने जिन ड्रोनों का इस्तेमाल किया था, वे भी तुर्की से मंगाए गए थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सभी ड्रोन अटैक को असफल कर दिया था।
Foreign Ministry सेलेबी मामले पर तुर्की दूतावास और हमारे विदेश मंत्रालय के बीच चर्चा हुई
Foreign Ministry जायसवाल ने कहा, “सेलेबी मामले पर तुर्की दूतावास और हमारे विदेश मंत्रालय के बीच चर्चा हुई है। लेकिन, मैं समझता हूं कि यह विशेष निर्णय नागरिक उड्डयन सुरक्षा ने लिया था, क्योंकि उन्हें सुरक्षा मुद्दों को संभालने का अधिकार है।”
एर्दोगन के शासनकाल में तुर्की धर्मनिरपेक्ष और पश्चिमी समर्थक लोकतंत्र से इस्लामवादी की तरफ बढ़ा है। पिछले कुछ सप्ताह में इस्लामाबाद को अंकारा के सैन्य, राजनयिक और मीडिया समर्थन ने भारत के साथ तनाव के बीच आग में घी डालने का काम किया है।

