Amroha News अमरोहा में खेती को ‘बिजनेस’ बना रहे 14 हजार किसान: 12 प्रमुख एफपीओ संभाल रहे सप्लाई चेन की कमान, ड्रोन व प्रोसेसिंग से मिली नई उड़ान*
*जिले में कुल 31 एफपीओ पंजीकृत, वर्ष 2024-25 में 27 संगठनों ने दर्ज किया था ₹2.10 करोड़ तक का टर्नओवर*
*योगी सरकार में ‘लैब टू लैंड’ अप्रोच और फार्म मशीनरी बैंक से घटी लागत, जैविक हल्दी, शहद और टाइपिंग पिक अमरूद से बढ़ रही धरतीपुत्रों की आमदनी*
Amroha News अमरोहा, 11 अक्टूबर। पारंपरिक खेती की सीमाओं और बिचौलियों के तंत्र को तोड़कर जनपद अमरोहा के किसान अब सामूहिक शक्ति के दम पर कृषि उद्यमिता की नई इबारत लिख रहे हैं। प्रदेश की योगी सरकार की किसान-कल्याणकारी नीतियों, केंद्र की ‘10,000 एफपीओ गठन योजना’ और राज्य कृषि संवर्धन अभियानों के तहत जिले में गठित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक संबल बन चुके हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनपद में वर्तमान में कुल 31 एफपीओ पंजीकृत हैं, जिनसे 14,039 शेयरहोल्डर किसानों को सीधे जोड़ा जा चुका है। पूर्व वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले के 27 एफपीओ ने सक्रिय व्यापार में उतरकर 5 लाख रुपये से लेकर 2.10 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर दर्ज कर एक मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया था। उसी मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के 12 प्रमुख एफपीओ पूरी सक्रियता के साथ धरातल पर बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और थोक सप्लाई चेन की कमान संभाल रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का सीधा और रिकॉर्ड मुनाफा मिल रहा है।
*मजबूत नींव पर आगे बढ़ा कारवां, 12 प्रमुख संगठन दे रहे बड़े विपणन को रफ्तार*
जिले में एफपीओ के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विभाग ने एक सुदृढ़ तंत्र विकसित किया है। इसके उत्साहजनक नतीजे पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में देखने को मिले थे, जब जिले के 27 एफपीओ ने विभिन्न कृषि उत्पादों के संगठित व्यापार के जरिए 5 लाख से लेकर 2.10 करोड़ रुपये तक का सालाना टर्नओवर हासिल किया था। पिछले वर्ष के इसी सफल मॉडल को विस्तार देते हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद के 12 प्रमुख एफपीओ पूरी क्षमता और नेतृत्वकारी भूमिका के साथ धरातल पर सक्रिय हैं। ये 12 अग्रणी संगठन इस समय जिले भर में बड़े पैमाने पर उत्पादों की थोक खरीद, ग्रेडिंग, ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और संस्थागत बाजारों तक सीधी आपूर्ति का जिम्मा संभाले हुए हैं। वहीं अन्य पंजीकृत संगठन भी स्थानीय स्तर पर किसानों को खाद-बीज और मशीनरी की सुविधाएं उपलब्ध कराकर अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।
*प्राकृतिक खेती, शहद, हल्दी और ‘टाइपिंग पिक अमरूद’ बनी नई पहचान*
योगी सरकार का विशेष जोर प्राकृतिक, जैविक और स्वास्थ्यवर्धक फसलों को सीधे बाजार से जोड़ने पर है। अमरोहा के एफपीओ ने इसी सोच को अपनाते हुए पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली विशिष्ट फसलों में अपनी साख बनाई है। जिले के प्रगतिशील किसान प्राकृतिक खेती, जैविक हल्दी, शुद्ध शहद, जैविक गुड़ और अमरोहा के मशहूर ‘टाइपिंग पिक अमरूद’ के उत्पादन व मूल्य संवर्धन में जुटे हैं। इसके साथ ही श्रीअन्न (मिलेट्स) से तैयार पौष्टिक उत्पादों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की सीधी ब्रांडिंग और पैकेजिंग से किसानों को सामान्य मंडियों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक लाभकारी मूल्य मिल रहा है।
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*प्रखंड बायो एनर्जी और अमरोहा कृषक विकास ने पेश की मिसाल*
किसानों की उपज की सामूहिक खरीद-बिक्री और बड़े खरीदारों से सीधा संपर्क साधने में जिले के दो एफपीओ ने सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इनमें ‘प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ और ‘अमरोहा कृषक विकास प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन दोनों संगठनों ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर किसानों के खेतों से ही सीधे उपज उठाने और बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने की सुगम व्यवस्था बनाई है। इसके अलावा ‘प्रगतिशील किसान उत्पादक संगठन सहकारी समिति लिमिटेड’ ने भी जैविक उत्पादों और जन स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के प्रचार-प्रसार व विपणन में किसानों के बीच उल्लेखनीय काम कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
*सस्ती खाद, आधुनिक ड्रोन और फार्म मशीनरी बैंक से घटी खेती की लागत*
प्रदेश सरकार द्वारा एफपीओ से जुड़े किसानों को आधुनिक तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराकर उत्पादन लागत को न्यूनतम करने पर काम किया जा रहा है। कृषि विभाग ने एफपीओ को उर्वरक प्राधिकार पत्र (लाइसेंस) जारी किए हैं, जिससे शेयरहोल्डर किसानों को तय सरकारी अनुदानित दरों पर समय से खाद उपलब्ध हो रही है। इसके साथ ही सरकार की ओर से आधुनिक कृषि ड्रोन, फार्म मशीनरी बैंक और प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और भारी वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र बाजार से बेहद कम दरों पर किराए पर मिल रहे हैं, जिससे बुवाई से लेकर कटाई तक का लागत खर्च काफी घट गया है।
*मिलेट्स मंडी से बाजार का रास्ता, ‘सीड प्रोडक्शन’ व ‘लैब टू लैंड’ से तय होगा भविष्य*
स्थानीय उत्पादों को निरंतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए जनपद में हाट केंद्र स्थापित किए गए हैं और मिलेट्स रेसिपी कार्यक्रमों के माध्यम से श्रीअन्न की मांग बढ़ाई जा रही है। किसानों की आय में निरंतर वृद्धि बनाए रखने के लिए कृषि विभाग ने तीन-सूत्रीय दूरगामी कार्ययोजना तैयार की है। पहली प्राथमिकता स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन (सीड प्रोडक्शन) में एफपीओ की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि क्षेत्र को गुणवत्तापूर्ण बीजों के लिए आत्मनिर्भर बनाया जा सके। दूसरी, कृषि विज्ञान केंद्रों के शोध को सीधे खेतों तक पहुंचाने के लिए ‘लैब टू लैंड’ अप्रोच को लागू करना है और तीसरी, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय मंडियों से अमरोहा के एफपीओ का सीधा और निर्बाध नेटवर्क स्थापित करना है।
*वर्जन*
“प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जनपद में एफपीओ के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि और सीधी बिक्री से जोड़ा जा रहा है। जिले के 14 हजार से अधिक किसान इस व्यवस्था के हिस्सेदार हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 27 एफपीओ ने करोड़ों रुपये का कारोबार कर मजबूत आधार रखा था और वर्तमान में 12 प्रमुख संगठन बड़े स्तर पर विपणन संभाल रहे हैं। आने वाले दिनों में सीड प्रोडक्शन और ‘लैब टू लैंड’ अप्रोच के जरिए एफपीओ को और अधिक सशक्त कर किसानों की आमदनी में इजाफा किया जाएगा।”

