देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के उग्र रूप ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। पूरे प्रदेश में पिछले 24 से 48 घंटों से रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में हालात बिगड़ने की आशंका जताते हुए नैनीताल, चंपावत और एक अन्य जनपद सहित 3 जिलों के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ (Red Alert) जारी किया है। कुदरत के इस रौद्र रूप को देखते हुए प्रदेशभर के 10 जिलों में आज (10 जुलाई) स्कूलों में एहतियातन छुट्टी घोषित कर दी गई है।
10 जिलों में स्कूल-आंगनबाड़ी बंद, डीएम के सख्त निर्देश
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और जलभराव के कारण रास्तों और नदी-नालों का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित जिलाधिकारियों (DM) ने कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, अर्धसरकारी, प्राइवेट स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन कराने को कहा गया है, उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई होगी।
पहाड़ दरकने से थम गए पहिए: उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में लैंडस्लाइड
एक तरफ जहां मैदानी इलाकों में जलभराव से हाहाकार है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी जिलों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) काल बनकर सामने आ रहा है। उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर भारी बोल्डर और मलबा गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। कई मुख्य हाईवे और ग्रामीण संपर्क मार्ग बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालु भी रास्ते में फंस गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) और जेसीबी मशीनें रास्ते खोलने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश बाधा बन रही है।
एक नज़र में आज के मौसम और बंद का हाल:
| प्रभावित क्षेत्र | प्रशासनिक अलर्ट / एक्शन | वर्तमान स्थिति |
| नैनीताल, चंपावत व अन्य | भारी बारिश का Red Alert | स्कूल-आंगनबाड़ी पूर्णतः बंद, नदियां उफान पर |
| उत्तराखंड के 10 जिले | जिला प्रशासन द्वारा एक दिवसीय अवकाश | कक्षा 1 से 12 तक की कक्षाएं स्थगित |
| पिथौरागढ़ व उत्तरकाशी | भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं | मलबे के कारण मुख्य मार्ग बाधित, जेसीबी तैनात |
प्रशासन की जनता और पर्यटकों से अपील
मौसम विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे इस बेहद खराब मौसम के दौरान किसी भी प्रकार की अनावश्यक यात्रा करने से बचें। खासकर नदी, नालों, गधेरों (पहाड़ी नालों) और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास बिल्कुल न जाएं और प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जा रही गाइडलाइंस का पालन करें।

