अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

Samvidhan Hatya Diwas : आपातकाल को CM धामी ने बताया ‘काला अध्याय’, देहरादून में लोकतंत्र सेनानियों का हुआ भव्य सम्मान

On: June 25, 2026 9:20 PM
Follow Us:
Samvidhan Hatya Diwas :
---Advertisement---

Samvidhan Hatya Diwas : भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख को शायद ही कोई भूल सकता है। यह वो दिन था जब रातों-रात देश पर आपातकाल (Emergency) थोप दिया गया था। इसी काले दिन की याद में आज देहरादून में ‘Samvidhan Hatya Diwas’ (संविधान हत्या दिवस) बेहद भावुक माहौल में मनाया गया। इस खास और महत्वपूर्ण मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन तमाम लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया, जिन्होंने आपातकाल के दौरान यातनाएं सहीं और देश में लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए कड़ा संघर्ष किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने बेहद कड़े शब्दों में उस दौर की तत्कालीन सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सिर्फ अपनी सत्ता की कुर्सी बचाने की खातिर देश के निर्दोष नागरिकों की स्वतंत्रता को निर्दयता से छीन लिया गया था। असल में, उस समय प्रेस की आजादी पर भी पूरी तरह से लगाम कस दी गई थी और बोलने की आजादी पर पहरा बैठा दिया गया था, जिसने हमारे संविधान की मूल भावना को गहरी चोट पहुंचाई। सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का संविधान हर एक नागरिक को बेखौफ अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है, लेकिन आपातकाल के दौरान इन बुनियादी हकों को कुचलने का जो प्रयास हुआ, वह इतिहास का एक बेहद काला अध्याय है।

Samvidhan Hatya Diwas पर सीएम ने याद किया जनता का संघर्ष

दरअसल, जब भी कोई सत्ता जनभावनाओं से खिलवाड़ करती है, तो जनता भी उसका जवाब अपने तरीके से ही देती है। मुख्यमंत्री ने इसी भावना का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही इमरजेंसी के दौरान तानाशाही दिखाते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या करने की कोशिश की गई, लेकिन देश की जागरूक जनता ने कभी हार नहीं मानी। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के दौरान सीएम ने उस दौर की जनक्रांति को याद करते हुए स्पष्ट किया कि देश के आम नागरिकों ने ही वोट की ताकत और लोकतांत्रिक माध्यमों से उस तानाशाही का मुंहतोड़ जवाब दिया था। इसी अदम्य साहस के दम पर ही भारत में लोकतंत्र की फिर से बहाली हो पाई।

लोकतंत्र सेनानियों के कल्याण के लिए राज्य सरकार के बड़े कदम

आज की पीढ़ी शायद उस दौर की मुश्किलों का अंदाजा भी न लगा पाए, लेकिन मौजूदा राज्य सरकार उन तमाम सेनानियों के त्याग और बलिदान को भूली नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और उनके परिजनों के कल्याण के लिए उत्तराखंड सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। आपको बता दें कि साल 2023 में ही राज्य सरकार ने इन सेनानियों को दी जाने वाली सम्मान निधि में एकमुश्त बड़ा इजाफा किया था। इस पेंशन राशि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 20 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा, आपातकाल के दौरान जो भी लोकतंत्र सेनानी जेल गए थे और उन पर जो उनके जीवनसाथी आश्रित हैं, उन्हें विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं। इस पहल का सीधा मकसद यह है कि उन्हें सरकारी सुविधाओं और सम्मान को प्राप्त करने में कोई भी सरकारी अड़चन न आए।

दिग्गजों का लगा जमावड़ा और एक भावुक समापन

राजधानी देहरादून में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सत्ता और संगठन के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे, जिन्होंने लोकतंत्र रक्षकों का हौसला बढ़ाया। मंच पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और वरिष्ठ नेता खजान दास जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। इनके अलावा विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार और महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल भी इस दौरान विशेष रूप से उपस्थित थे।

कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम न सिर्फ अतीत के उन काले पन्नों को पलटने और उनसे सबक लेने का एक अवसर था, बल्कि उन सच्चे नायकों को नमन करने का भी पल था, जिनकी बदौलत आज हम और आप एक खुली, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक हवा में सांस ले पा रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply