मुंबई (गिरजा शंकर अग्रवाल): भारतीय संस्कृति, धर्म और सनातन संस्कारों को बढ़ावा देने तथा उनके संरक्षण के लिए ‘सनातन सेना’ (Sanatan Sena) ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। संगठन के प्रमुख सुरजीत सिंह ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि सनातन सेना द्वारा बहुत जल्द एक ‘गुरुकुल’ (Gurukul) की स्थापना की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, भारतीय संस्कृति, नैतिकता और सनातन जीवन मूल्यों से गहराई से जोड़ना है।
आधुनिक युग में ‘संस्कारयुक्त शिक्षा’ की जरूरत
गुरुकुल की स्थापना के विजन पर बात करते हुए सनातन सेना प्रमुख सुरजीत सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में आधुनिक शिक्षा का प्रभाव और दायरा तेजी से बढ़ रहा है। आधुनिक शिक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही युवाओं के लिए ‘संस्कारयुक्त शिक्षा’ की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कारों के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी मांग है और यह गुरुकुल इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास होगा।
क्या होगी गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली?
सुरजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि इस गुरुकुल में सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं दिया जाएगा, बल्कि यहां एक संपूर्ण जीवन दर्शन सिखाया जाएगा।
पाठ्यक्रम: विद्यार्थियों को विशेष रूप से वेद, पुराण, योग, ध्यान (Meditation) और गौरवशाली भारतीय इतिहास की शिक्षा दी जाएगी।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि गुरुकुल से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी न केवल आधुनिक समाज में सफल हों, बल्कि वे संस्कारित, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति जागरूक नागरिक भी बनें।
समाज से की सहयोग की अपील
सनातन सेना प्रमुख ने इस पुनीत कार्य के लिए समाज के सभी वर्गों से आगे आकर सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि यह गुरुकुल न केवल धर्म और संस्कृति की रक्षा करेगा, बल्कि हमारे समाज और राष्ट्र के एक उज्जवल भविष्य के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगा।

