Gold-Silver Price:नई दिल्ली: शादियों के सीजन और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सर्राफा बाजार में हलचल तेज है। मंगलवार को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में फिर से तेजी का रुख देखने को मिला है। घरेलू बाजार से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) और महंगाई के डर ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर सुरक्षित निवेश यानी सोने की तरफ खींचा है।
वायदा बाजार (MCX) में उछला सोना-चांदी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार सुबह से ही तेजी का माहौल रहा:
सोना (Gold): सुबह 10:13 बजे 5 जून 2026 की डिलीवरी वाले अनुबंध के लिए सोने का भाव 0.25 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,50,358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
चांदी (Silver): इसी समय 5 मई 2026 की डिलीवरी वाले अनुबंध के लिए चांदी की कीमत भी 0.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,34,300 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड करती दिखी।
महानगरों में सोने की हाजिर कीमत (Spot Prices)
गुडरिटर्न्स (goodreturns) के आंकड़ों के मुताबिक, 7 अप्रैल को देश के प्रमुख महानगरों में सोने के हाजिर भाव इस प्रकार दर्ज किए गए हैं:
दिल्ली:
24 कैरेट (99.9% शुद्धता): 14,999 रुपये प्रति ग्राम
22 कैरेट (91.6% शुद्धता): 13,750 रुपये प्रति ग्राम
18 कैरेट (75% शुद्धता): 11,253 रुपये प्रति ग्राम
मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु: (इन तीनों शहरों में भाव समान रहे)
24 कैरेट: 14,984 रुपये प्रति ग्राम
22 कैरेट: 13,735 रुपये प्रति ग्राम
18 कैरेट: 11,238 रुपये प्रति ग्राम
चेन्नई: (यहां कीमतों में थोड़ी अधिक बढ़त रही)
24 कैरेट: 15,120 रुपये प्रति ग्राम
22 कैरेट: 13,860 रुपये प्रति ग्राम
18 कैरेट: 11,560 रुपये प्रति ग्राम
अंतर्राष्ट्रीय बाजार और ईरान युद्ध का असर
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स (tradingeconomics) के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगातार दो सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को सोने की कीमत लगभग 4,650 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर स्थिर रही।
बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया बयान पर है, जिसमें उन्होंने शर्तें पूरी न होने पर ईरानी नागरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इस लंबे खिंचते संघर्ष के कारण वैश्विक आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से सोने में लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है, लेकिन ईरान युद्ध से जुड़ी ऊर्जा कीमतों में उछाल ने मुद्रास्फीति (Inflation) के डर को बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसलों पर पड़ रहा है।

