नयी दिल्ली: Congress ने कहा है कि लोकतंत्र ने जनता को मतदान का अधिकार दिया है लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग को मोहरा बनाकर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर साजिशन चोट करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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Congress संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा तथा बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोकतंत्र में जिस चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है वो मोहरा बनकर काम कर रहा है।
उनका कहना था कि विपक्ष के लोग आयोग से चुनाव में पारदर्शिता संबंधी मामले में मिलने गये। इसी मुद्दे पर लोक सभा में Congress नेता विपक्ष राहुल गांधी तथा राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आयोग से वोटर लिस्ट और वोटिंग के दिन की फुटेज मांग रहे हैं। महीनों तक जवाब नहीं आता तो कैसे भरोसा करें कि वह एक माह में बिहार में मतदाताओं की सूची तैयार कर लेगा।
उन्होंने चुनाव आयोग पर नये नियम थोपने का आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर जब कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन का प्रतिनिधिमंडल मिलने गया तो मुख्य चुनाव आयुक्त धमकाने वाले लहजे में कहते हैं कि ये ‘नया चुनाव आयोग है, नया नॉर्मल है’- जिसमें चुनाव आयुक्त तय करेंगे कि वे कांग्रेस के किस नेता से मिलेंगे।
उन्होंने आयोग पर नयी परंपरा शुरु करने का आरोप लगाया और कहा कि वह पत्रकारों को मैसेज कर खबरें प्लांट करते हैं और सोचते हैं, बात गुप्त रह जाएगी लेकिन सच यह है कि कोई बात गुप्त नहीं रहती है।
Congress नेताओं ने कहा कि अलग-अलग संस्थाओं में काम करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि वे जिस कुर्सी हैं,उनसे पहले कहीं बेहतर लोग उन कुर्सियों पर बैठे हैं और आने वाले समय में और भी अच्छे लोग बैठेंगे। सवाल है आप क्या विरासत छोड़कर जाएंगे, देश के लोग आपको किस लिए याद रखे। क्या देश चुनाव आयोग के अधिकारियों को इसलिए याद रखेगा कि पूरा विपक्ष वोटर लिस्ट मांग रहा था और उसे लिस्ट नहीं दी जा रही है।
वोटिंग के वीडियो फुटेज 45 दिन बाद नहीं दिए जाएंगे और महाराष्ट्र में अचानक पांच बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन आपने आज तक इस पर जवाब नहीं दिया1 इसलिए कांग्रेस को लगता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है और यह खतरा सिर्फ विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि हर एक वोटर के लिए है।
Congress नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में मतदताओं से जो दस्तावेज मांगे जा रहे हैं वे बिहार की जनता के पास कभी थे ही नहीं या फिर अब बर्बाद हो चुके होंगे। इससे दलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, प्रवासी महिलाएं, अनाथ बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
यदि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण को देखेंगे तो 2001-2006 के बीच बिहार में जन्मे सिर्फ 2.28 प्रतिशत बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2002 में बिहार में जन्म पंजीकरण की दर 3.7 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 56.2 प्रतिशत था। साल 2004-2005 में भी बिहार में जन्म पंजीकरण की दर 11.16 प्रतिशत से भी कम थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 60.64 प्रतिशत था।
Congress ने आयोग पर नयी परंपरा शुरु करने का आरोप लगाया और कहा कि वह पत्रकारों को मैसेज कर खबरें प्लांट करते हैं
उन्होंने कहा कि लोगों को वोट करने से वंचित रखने का चुनाव आयोग का यह रवैया, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के दिए हुए, उस मौलिक अधिकार का हनन होगा, जिसमें समान वोट का अधिकार है। यह फैसला लोगों को वोट से वंचित करने का है- जिसका हम पुरज़ोर विरोध करते हैं।

