देहरादून: उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता और संचालन को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब इससे जुड़े आंकड़े सामने आए हैं।
प्रदेश में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने के लिए उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के स्तर पर भी मदरसों की मान्यता प्रक्रिया जारी है। सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, नई व्यवस्था से पहले पंजीकृत 452 मदरसों में से 179 बंद हो चुके हैं, जबकि 19 मदरसों को नियमों का पालन नहीं करने के कारण सील किया गया है।
वहीं, शिक्षा विभाग से अब तक 30 मदरसों को मान्यता मिलने की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से 35 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिलने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों के बीच कई मदरसे मान्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं, जबकि कुछ संस्थानों ने अभी आवेदन नहीं किया है।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन
उत्तराखंड में मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता व्यवस्था में बदलाव के तहत 3 फरवरी 2026 को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया था। इस नई व्यवस्था के जरिए अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्राधिकरण के गठन के बाद मदरसा संचालकों के बीच मान्यता प्रक्रिया, निर्धारित मानकों और नई व्यवस्था को लेकर चर्चा बनी हुई है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग भी अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्थानों की मान्यता से जुड़े आवेदनों पर कार्रवाई कर रहा है।
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452 पंजीकृत मदरसों में से 179 बंद
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, नई व्यवस्था से पहले उत्तराखंड में कुल 452 मदरसे पंजीकृत थे। इनमें से वर्तमान रिकॉर्ड के अनुसार 179 मदरसे बंद हो चुके हैं। यह संख्या कुल 452 पंजीकृत मदरसों का लगभग 39.60 प्रतिशत है।
इसके अलावा 19 मदरसों को नियमों का पालन नहीं करने के कारण सील किया गया है। इससे प्रदेश में मदरसों के संचालन, नियमन और मान्यता से जुड़ी स्थिति का पता चलता है। हालांकि, बंद और सील किए गए संस्थानों की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति तथा उनके रिकॉर्ड का विस्तृत विवरण संबंधित विभाग से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
शिक्षा विभाग से 30 मदरसों को मिली मान्यता
मदरसों की मान्यता प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग से अब तक 30 मदरसों को मान्यता मिलने की जानकारी दी गई है। 452 पुराने पंजीकृत मदरसों की तुलना में यह संख्या लगभग 6.64 प्रतिशत है।
प्राधिकरण के गठन के बाद लगभग साढ़े सात महीने की अवधि में शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के माध्यम से मान्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हालांकि, शिक्षा विभाग और प्राधिकरण की मान्यता अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत होने के कारण दोनों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
मान्यता के लिए कितने मदरसों ने आवेदन किया?
प्राप्त विवरण के अनुसार, उत्तराखंड में कई मदरसे मान्यता प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं।
मान्यता और संचालन से जुड़े आंकड़े
पहले पंजीकृत मदरसे
452
बंद मदरसे
179
सील किए गए मदरसे
19
शिक्षा विभाग से मान्यता
30
मान्यता के लिए आवेदन करने वाले
134
आवेदन नहीं करने वाले
54
प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त संस्थान
35
आंकड़ों के मुताबिक, 134 मदरसों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि 54 मदरसे ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। इससे पता चलता है कि कई संस्थानों की स्थिति बंद होने, मान्यता हासिल करने या आवेदन की प्रक्रिया में होने के रूप में दर्ज की गई है।
बिना निर्धारित मानकों के संचालित संस्थानों पर सरकार की नजर
उत्तराखंड सरकार की ओर से मान्यता प्रक्रिया के साथ-साथ उन संस्थानों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जो निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे हैं। विभागीय स्तर पर प्राप्त आवेदनों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी गई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते के अनुसार, मान्यता के लिए प्राप्त आवेदनों पर लगातार कार्रवाई की प्रक्रिया गतिमान है। इसका उद्देश्य मान्यता प्रक्रिया को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार आगे बढ़ाना है।
आने वाले समय में बदल सकती है मदरसों की स्थिति
उत्तराखंड में नई मान्यता व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। 452 पंजीकृत मदरसों में से 179 का बंद होना, 19 संस्थानों का सील किया जाना और शिक्षा विभाग से 30 मदरसों को मान्यता मिलना इस प्रक्रिया के प्रमुख बिंदु हैं।
अब निगाहें उन 134 मदरसों पर रहेंगी, जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन किया है। इन संस्थानों में से कितने निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं और कितनों को आगे मान्यता मिलती है, यह संबंधित विभाग की जांच और निर्णय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
वहीं, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को निर्धारित मानकों के आधार पर मान्यता देने की प्रक्रिया आगे जारी रहने की उम्मीद है।

