केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 1940 से लंबित इस परियोजना को अब केंद्र और 6 राज्यों के आपसी समन्वय से निर्णायक गति मिली है।
समझौते में शामिल राज्य
इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित राज्यों के बीच सहमति बनी है:
उत्तराखण्ड
हिमाचल प्रदेश
उत्तर प्रदेश
हरियाणा
राजस्थान
दिल्ली
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ
यह केवल एक बांध नहीं, बल्कि बहुउद्देशीय योजना है जो पूरे अपर यमुना बेसिन को लाभान्वित करेगी:
विशाल जलाशय: परियोजना के तहत 1,562 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर) क्षमता का जलाशय बनाया जाएगा।
विद्युत उत्पादन: इससे 422 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
बहुआयामी लाभ: यह प्रोजेक्ट जल सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण में मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रमुख बिंदु
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने इसे ‘अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कुछ प्रमुख चुनौतियों का भी जिक्र किया:
प्रभावितों का पुनर्वास: परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों का संवेदनशील और सम्मानजनक पुनर्वास उत्तराखण्ड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
वन भूमि का हस्तांतरण: इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2,500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी।
क्षतिपूरक वनीकरण: उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना एक चुनौती है, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र और सहभागी राज्यों से भूमि चिन्हित करने में सहयोग की अपील की है।
यह ऐतिहासिक समझौता भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
क्या आप इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों या किसी विशिष्ट राज्य को मिलने वाले पानी/बिजली के हिस्से के बारे में और जानकारी चाहते हैं?

