छोटे कर्मचारी पर गाज, रसूखदारों पर रहम: विधुत विभाग में कार्रवाई के नाम पर भेदभाव, लाइनमैन की बर्खास्तगी से उठे सवाल
बदायूं। उत्तर प्रदेश विधुत विभाग में कार्रवाई के दोहरे मापदंड का गंभीर मामला सामने आया है।सहसवान तहसील क्षेत्र में लाइनमैन के पद पर कार्यरत रहे फुरकान हुसैन ने मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच एवं न्याय की गुहार लगाई है।
पत्र के अनुसार,फुरकान हुसैन के घर 21 सितंबर 2024 को विद्युत चेकिंग के दौरान विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। उनके पास वैध विधुत कनेक्शन मौजूद था एवं विभाग द्वारा निर्धारित जुर्माना भी उनके द्वारा जमा कर दिया गया था।इसके बावजूद 12 अक्टूबर 2024 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
इसी संबंध में सामने आए एक अन्य वर्तमान प्रकरण में, 8 सितंबर 2026 को लाइनमैन फैजानुद्दीन के किराए के स्थान पर लगभग 25 बैटरी ई-रिक्शा चोरी से चार्ज किए जाने का मामला एसडीओ जयप्रकाश एवं विजिलेंस टीम ने पकड़ा।जांच में चोरी की केबल बरामद हुई और मुनीर अख्तर के नाम से धारा 135 के तहत एफआईआर दर्ज की गई, किंतु उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित लाइनमैन फैजानुद्दीन के विरुद्ध कोई विभागीय कार्यवाही या सेवा संबंधी कार्यवाही नहीं की गई।
फुरकान का तर्क है कि उनके मामले में वैध कनेक्शन और जुर्माना जमा होने के बावजूद सेवा समाप्त कर दी गई।जबकि इससे कहीं अधिक गंभीर परिस्थितियों वाले वर्तमान प्रकरण में लाइनमैन के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई न होना सीधे तौर पर भेदभाव और दोहरे मापदंड को दर्शाता है।उन्होंने अपने प्रकरण और 8 सितंबर 2026 के प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, सेवा समाप्ति के आधारों की समीक्षा करने तथा दोनों मामलों में अपनाई गई कार्रवाई एवं अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी

