up-panchayat-elections-delay-लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, यूपी में पंचायत चुनाव टलना लगभग तय माना जा रहा है। अब ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाने की संभावना है।
प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में योगी सरकार ग्राम प्रधानों को ही ‘प्रशासक’ (Administrator) नियुक्त करने की बड़ी तैयारी कर रही है। यूपी के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
क्यों टल रहे हैं पंचायत चुनाव?
यूपी में पिछली बार 2021 में पंचायत चुनाव हुए थे। इस बार चुनाव टलने का मुख्य कारण पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में हुई देरी है। पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने हेतु गठित आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में अभी कम से कम 6 महीने का समय लगेगा। इसके अलावा, राज्य में पंचायत चुनाव की फाइनल मतदाता सूची (Voter List) भी अब तक जारी नहीं की गई है।
ADO को प्रशासक बनाने में क्या है अड़चन?
26 मई को कार्यकाल खत्म होने के बाद नियमतः सरकार के पास दो विकल्प हैं— या तो सरकारी अधिकारियों (ADO) को प्रशासक नियुक्त किया जाए, या फिर प्रधानों को ही प्रशासनिक समिति का अध्यक्ष (प्रशासक) बना दिया जाए।
अगर सहायक विकास अधिकारियों (ADO) को यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। यूपी में वर्तमान में सिर्फ 825 ADO हैं। अगर इन्हें 57,695 पंचायतों का जिम्मा सौंपा गया, तो एक अधिकारी पर करीब 70 पंचायतों का बोझ आ जाएगा, जो व्यावहारिक रूप से काम करने के लिहाज से असंभव है।
प्रधानों को प्रशासक बनाने से क्या होगा बदलाव?
अगर सरकार उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 12 (3A) के तहत प्रधानों को प्रशासक बनाती है, तो प्रधान जनप्रतिनिधि न रहकर सरकार के ‘अस्थाई प्रशासक’ के तौर पर काम करेंगे। उनके साथ वार्ड मेंबर समिति में रहेंगे और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) सचिव के रूप में उनके प्रशासनिक कामों में मदद करेंगे।
प्रधान संघ भी लंबे समय से इसकी मांग कर रहा है। पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह का कहना है कि 2020-21 में जब सरकारी अधिकारियों को प्रशासक बनाया गया था, तब कई घोटाले सामने आए थे। ऐसे में विकास कार्यों को सुचारू रखने के लिए प्रधानों को ही प्रशासक बनाना जनता के हित में है।
2027 के लिए बीजेपी का ‘मास्टरस्ट्रोक’
सियासी जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी के लिए भी यह एक फायदेमंद कदम साबित होगा। यह 57 हजार से ज्यादा प्रधानों के लिए एक बड़े तोहफे जैसा है। ग्राम प्रधान स्थानीय स्तर पर जातीय समीकरण तय करने और बूथ मैनेजमेंट में अहम रोल निभाते हैं, जिसका सीधा फायदा सत्ताधारी पार्टी को आगामी चुनावों में मिल सकता है।

