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सोरायसिस एवं शुष्क एक्जिमा में होम्योपैथी और योग की समन्वित भूमिका –डॉ. अमोल गुप्ता

On: July 2, 2026 8:25 PM
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सोरायसिस एवं शुष्क एक्जिमा में होम्योपैथी और योग की समन्वित भूमिका –डॉ. अमोल गुप्ता

कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक, जीर्ण एवं चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल, सहसवान

सहसवान।डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल, सहसवान के कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक जीर्ण एवं चर्म रोगविशेषज्ञ डॉ. अमोल गुप्ता ने कहा कि शुष्क एक्जिमा (Dry Eczema) एवं सोरायसिस (Psoriasis) केवल त्वचा के रोग नहीं हैं,बल्कि ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, मानसिक तनाव, आनुवंशिक प्रवृत्ति तथा जीवनशैली से भी जुड़े होते हैं। इन रोगों के समग्र एवं दीर्घकालिक प्रबंधन में होम्योपैथी और योग का संतुलित समन्वय अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

उन्होंने बताया कि शुष्क एक्जिमा में त्वचा का अत्यधिक सूखापन,खुजली,लालिमा एवं पपड़ी बनना प्रमुख लक्षण हैं,जबकि सोरायसिस में त्वचा पर मोटी, लाल एवं चांदी जैसी सफेद परतें बनने लगती हैं।तनाव,नींद की कमी,अनियमित दिनचर्या,प्रदूषण तथा मौसम में परिवर्तन इन रोगों को बढ़ा सकते हैं।

डॉ. अमोल गुप्ता ने कहा कि होम्योपैथी रोगी की संपूर्ण शारीरिक एवं मानसिक अवस्था का मूल्यांकन कर व्यक्तिगत उपचार प्रदान करती है।इसका उद्देश्य केवल त्वचा के लक्षणों को कम करना ही नहीं, बल्कि रोग की पुनरावृत्ति की प्रवृत्ति को भी नियंत्रित करने का प्रयास करना है।उचित चिकित्सकीय परामर्श के साथ उपचार लेने से अनेक रोगियों में खुजली, सूजन, पपड़ी तथा त्वचा की शुष्कता में सुधार देखा जाता है।

उन्होंने बताया कि योग शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है।नियमित योगाभ्यास तनाव कम करने, रक्त संचार सुधारने, बेहतर नींद लाने तथा समग्र स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है, जो त्वचा रोगों के प्रबंधन में भी सकारात्मक भूमिका निभाता है।डॉ. गुप्ता ने निम्न योगाभ्यास नियमित करने की सलाह दी—

अनुलोम-विलोम प्राणायाम – मानसिक तनाव कम करने एवं श्वसन तंत्र को संतुलित रखने में सहायक।

भ्रामरी प्राणायाम – मन को शांत कर तनाव एवं चिंता कम करने में लाभकारी।

नाड़ी शोधन प्राणायाम – शरीर एवं मन में संतुलन स्थापित करने में सहायक।

वज्रासन – पाचन क्रिया में सुधार कर समग्र स्वास्थ्य को समर्थन देता है।

भुजंगासन – रीढ़ एवं छाती को सक्रिय कर शरीर में लचीलापन बढ़ाता है।

ताड़ासन – शरीर की मुद्रा एवं संतुलन में सुधार करता है।

शवासन – मानसिक एवं शारीरिक विश्राम प्रदान कर तनाव कम करता है।

उन्होंने यह भी सलाह दी कि त्वचा को अत्यधिक सूखने से बचाने के लिए पर्याप्त पानी पिएं, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें, धूम्रपान एवं शराब से बचें, पर्याप्त नींद लें तथा अत्यधिक तनाव से दूर रहें। त्वचा पर किसी भी प्रकार की दवा या घरेलू उपाय अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

अंत में डॉ.अमोल गुप्ता ने कहा कि “होम्योपैथी और योग का उद्देश्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को संतुलित करना है। नियमित योग, स्वस्थ जीवनशैली एवं विशेषज्ञ की देखरेख में होम्योपैथिक उपचार अपनाकर शुष्क एक्जिमा और सोरायसिस के रोगी बेहतर जीवन गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी 

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