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न्यायाधीशों को महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा से जुड़े मामलों में अनुचित टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए: Supreme Court

On: April 16, 2025 3:39 PM
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Supreme Court
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नयी दिल्ली: Supreme Court  ने मंगलवार को कहा कि न्यायाधीशों को महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा से जुड़े मामलों में अनुचित टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।

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न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 17 मार्च को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश (जिसमें दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को जमानत देते समय की गई टिप्पणी) पर स्वत: संज्ञान सुनवाई करते हुए आपत्ति जतायी और यह नसीहत दी।

Supreme Court ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई, जिन्होंने दुष्कर्म के एक आरोपी को जमानत देते समय टिप्पणी की थी कि पीड़िता ने ‘खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया और इसके लिए वह जिम्मेदार है।’

Supreme Court ने कहा कि आरोपी को जमानत देते समय की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायाधीशों को महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा से जुड़े मामलों में अनुचित टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।

Supreme Court  खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया और इसके लिए वह जिम्मेदार है

पीठ (शीर्ष अदालत) ने कहा, “इस उच्च न्यायालय (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) में क्या हो रहा है? अब उसी उच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश ने ऐसी बातें कही हैं… हां, जमानत दी जा सकती है। लेकिन यह क्या चर्चा है कि ‘उसने खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया आदि’। ऐसी बातें कहते समय खासकर इस तरफ सावधानी बरतनी चाहिए।”

इससे पहले, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ऐसी टिप्पणियों में (जिससे पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया था) कहा था कि एक बच्ची के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं है।

पीठ ने (15 अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान) कहा कि जमानत देना न्यायाधीश का विवेकाधिकार है, जो प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है, लेकिन शिकायतकर्ता के खिलाफ इस तरह की अनुचित टिप्पणियों से बचना चाहिए।

अदालत के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि न केवल पूरा न्याय किया जाना चाहिए, बल्कि यह भी दिखना चाहिए कि न्याय किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “एक आम व्यक्ति ऐसे आदेशों को कैसे देखता है, यह भी देखना होगा।”

पीठ ने इस साल मार्च में उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें दिसंबर 2024 में दिल्ली के हौज खास में एक बार में मिली एक महिला के कथित दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी को जमानत दी गई थी।

 

 

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