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Sahaswan News: डेड शताब्दी से आस्था का केंद्र बना नाथ बाबा का मंदिर, आज भी छत का इंतजार

On: October 21, 2026 5:05 PM
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Sahaswan News: डेड शताब्दी से आस्था का केंद्र बना नाथ बाबा का मंदिर, आज भी छत का इंतजार

चर्म रोग से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु, बारिश में खुले आसमान के नीचे विराजमान रहते हैं बाबा नाथ

सहसवान (बदायूं) सहसवान-इस्लामनगर मार्ग पर नगर सीमा से लगभग दो किलोमीटर दूर सरसोंता तीर्थ स्थल स्थित गोरखनाथ बाबा पीठ का नाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां चर्म रोग से पीड़ित लोग बाबा नाथ के दरबार में पहुंचकर रोग से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु मंदिर में धूप और प्रसाद चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार,करीब दो-तीन दशक पहले जब चर्म रोगों के उपचार के साधन सीमित थे।और उसे समय चरम रोग बड़े पैमाने पर लोगों को होते थे चर्म रोग की दवा न होने पर लोग तब बाबा नाथ के मंदिर में पहुंचकर स्वस्थ होने की प्रार्थना करते थे। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर की मान्यता आज भी कायम है।दूर-दराज से आने वाले आस्थावान लोग मंदिर में नतमस्तक होकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं।

आस्था के केंद्र पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव:-एक ओर मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है,वहीं दूसरी ओर मंदिर परिसर में पर्याप्त निर्माण न होने से भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।मंदिर में छत तक की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बाबा नाथ की मूर्ति खुले आसमान के नीचे विराजमान है।गर्मी के साथ-साथ वर्षा ऋतु में भी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।श्रद्धालुओं का कहना है कि इतने पुराने और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थल पर आवश्यक सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है।यदि मंदिर का भव्य निर्माण कराकर छत सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो यहां आने वाले भक्तों को काफी राहत मिलेगी।
शासन-प्रशासन से भव्य मंदिर निर्माण की मांग:-श्रद्धालुओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि गोरखनाथ बाबा पीठ के नाथ मंदिर का भव्य निर्माण कराया जाए तथा परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं।इससे न केवल धार्मिक स्थल का विकास होगा,बल्कि वर्षों से चली आ रही लोगों की आस्था को भी सम्मान मिलेगा।अब देखना यह है कि श्रद्धालुओं की इस मांग पर संबंधित अधिकारी कब तक ध्यान देते हैं।रिपोर्ट-एस.पी.सैनी

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