कथा के अंतिम दिन पंडित हर्षित उपाध्याय ने सुदामा चरित्र का मार्मिक भाव से वर्णन किया
कथा के अंतिम दिन भारी भीड़ उमड़ी, कथा सुनकर भक्ता हुए आत्म विभोर,
(सहसवान से समर इंडिया एस. पी. सैनी की रिपोर्ट)

सहसवान(बदायूं )श्री बांके बिहारी मंदिर जहांगीराबाद में चल रहे श्रीमद भागवत कथा का शनिवार को विश्राम हो गया। कथा के अंतिम दिन भक्तों ने व्यास पूजन किया।
कथा प्रवक्ता पंडित हर्षित उपाध्याय ने सुदामा चरित्र का बड़े ही मार्मिक भाव से वर्णन किया। कहा कि शब्दों का प्रयोग बड़ी सावधानी से करें। ये आपकी परवरिश का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं। श्री भागवत जी कल्पवृक्ष हैं। आप जो मांगते हैं भागवत आपको देती हैं। जो भाग्य में होता है भागकर आता है। नहीं होता है आकर भी चला जाता है। पद-प्रतिष्ठा के नहीं अपितु कर्म के उपासक बनें। जो निष्ठापूर्वक सदैव अपने कर्म का निर्वाह करते हैं।मान, पद, प्रतिष्ठा सभी के अधिकारी भी बन जाते हैं। अपने लक्ष्य के प्रति सजग एवं सावधान रहते हुए सदैव कर्मशील बने रहें, क्योंकि कर्म करने पर तो हार या जीत कुछ भी मिल सकती है, पर कर्म ना करने पर केवल हार ही हाथ लगती है।

आगे श्री उपाध्याय ने कहा दुनिया के महान व्यक्ति केवल इसीलिए सफल हो पाए हैं क्योंकि वो प्रत्येक क्षण अपने उद्देश्य में, अपने संकल्प में संलग्न रहे। पुरुषार्थी के पुरुषार्थ के आगे तो भाग्य भी विवश होकर फल देने के लिए बाध्य हो जाता है। दृढ़ संकल्प एवं पुरुषार्थ के बल पर भगीरथ तो देवलोक से गंगा माँ को भी धरती पर ले आए थे। समय व्यर्थ मत जाने दो। अपने प्रयत्न जारी रखो। सफलता बाँह फैलाकर आपका स्वागत करने के लिए खड़ी है।
कथा के मध्य में राधाकृष्ण की सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गई।
कथा में दीपान्शु माहेश्वरी, उषा माहेश्वरी, राम प्रकाश, ज्योति, दीक्षा, वैष्णवी, कुक्कु माहेश्वरी आदि मौजूद रहे।
