PM Modi Nation Address :नई दिल्ली/पॉलिटिकल डेस्क: लोकसभा में ‘131वां संविधान संशोधन विधेयक’ (महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा बिल) के गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम एक बेहद भावुक और हमलावर संबोधन दिया। पीएम मोदी ने इस घटना को भारत के लोकतंत्र के लिए एक ‘दुखद मोड़’ करार दिया। प्रधानमंत्री के कड़े तेवरों से यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी चुनावों में यह मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनने जा रहा है।
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तीखे प्रहार किए और महिलाओं को उनका हक दिलाने का दृढ़ संकल्प दोहराया। आइए जानते हैं पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें:
1. विपक्ष पर ‘विश्वासघात’ का सीधा आरोप
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने सदन में बिल का विरोध कर देश की करोड़ों माताओं-बहनों के साथ खुला विश्वासघात किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो राजनीतिक दल बाहर नारी शक्ति की जय-जयकार करने का दिखावा करते हैं, असल में उन्होंने ही संसद के भीतर महिलाओं के हक का गला घोंटा है।”
2. ‘भ्रूण हत्या’ से की विपक्ष के कृत्य की तुलना
पीएम मोदी ने बेहद कड़े और तल्ख शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि विपक्ष ने इस बिल को गिराकर “नारी शक्ति के अधिकारों की भ्रूण हत्या” की है। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, सपा और डीएमके जैसे विपक्षी दलों को इस पूरी घटना का मुख्य गुनहगार ठहराया।
3. भावुक होकर देश की माताओं-बहनों से मांगी क्षमा
संबोधन के दौरान भावुक होते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं आज देश की करोड़ों माताओं-बहनों का क्षमाप्रार्थी हूं। हमारी नीयत बिल्कुल साफ थी, हम आपको 2029 से आपका हक देना चाहते थे, लेकिन कुछ दलों की स्वार्थपूर्ण राजनीति ने आपके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया।”
4. ‘यह राजनीतिक स्वार्थ की जीत और देश की हार है’
पीएम ने दुख जताते हुए स्पष्ट किया कि सदन में बहुमत का आंकड़ा (352 वोट) न मिल पाने के कारण बिल का गिरना केवल सरकार की हार नहीं है। यह उन करोड़ों बेटियों की हार है, जो 2029 में देश की संसद पहुंचने का सपना देख रही थीं।
5. ‘यह किसी से कुछ छीनने का प्रयास नहीं था’
प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह संशोधन किसी राज्य या किसी विशेष वर्ग से उनका अधिकार छीनने के लिए नहीं लाया गया था। यह 21वीं सदी की नारी को नई उड़ान और प्रतिनिधित्व देने का एक “पवित्र महायज्ञ” था, जिसे विपक्ष ने बाधित किया है।
6. दक्षिण भारत के राज्यों को दिया बड़ा आश्वासन
विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे डर और क्षेत्रीय असंतुलन के दावों को सिरे से खारिज करते हुए पीएम ने कहा कि यह बिल उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम—सभी राज्यों की आवाज को संसद में और मजबूत करने के लिए था। इसका उद्देश्य किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम करना नहीं था।
7. सीटों के गणित पर दिया स्पष्टीकरण (543 से 816 सीटें)
पीएम ने सीटों के गणित को स्पष्ट करते हुए बताया कि सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती थी। इसके पीछे मुख्य कारण यही था कि किसी भी राज्य की वर्तमान ताकत और प्रतिनिधित्व को कम किए बिना महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जा सके। उन्होंने विपक्ष के दावों को कोरा झूठ बताया।
8. विपक्ष को चेतावनी: ‘नारी अपमान नहीं भूलती’
प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं से इस अपमान को याद रखने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “इतिहास गवाह है कि जिसने भी नारी शक्ति का अनादर किया है, समय ने उसे कभी माफ नहीं किया। नारी अपमान नहीं भूलती है और विपक्ष को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी ही होगी।”
9. ‘मिशन अधूरा है, लेकिन मोदी की गारंटी है’
पीएम ने साफ कर दिया कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने दृढ़ संकल्प लेते हुए कहा, “यह मिशन अभी अधूरा जरूर है, लेकिन यह मोदी की गारंटी है कि मैं हर संवैधानिक रास्ते का उपयोग करूंगा और महिलाओं को उनका जायज हक दिलाकर ही दम लूंगा।”

