दीपावली के उल्लास और आस्था के बीच उत्तराखंड के चारधाम इन दिनों फूलों की खुशबू से महक रहे हैं। बाबा केदारनाथ से लेकर मां गंगा और मां यमुना के धाम तक रंग-बिरंगे फूलों से भव्य सजावट की गई है। शीतकालीन विदाई की तैयारियां तेज हो गई हैं और अगले कुछ दिनों में चारों धामों के कपाट विधि-विधान से बंद हो जाएंगे।
केदारनाथ में 18 क्विंटल फूल, भैरवनाथ के कपाट बंद
केदारनाथ धाम को करीब 18 से 20 क्विंटल विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। दीपावली के अवसर पर बाबा केदार का दरबार और मंदिर परिसर फूलों से सुसज्जित होकर अलौकिक छटा बिखेर रहा है। इस बीच शनिवार को क्षेत्रपाल एवं धाम के रक्षक भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। आगामी 11 नवंबर को विधि-विधान के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे।
गंगोत्री-यमुनोत्री में भी भव्य सजावट
उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी दीपावली और शीतकालीन कपाट बंद होने से पहले विशेष सजावट की गई है। गंगोत्री मंदिर को करीब पांच क्विंटल और यमुनोत्री मंदिर को तीन क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को बंद किए जाएंगे, इसके बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव पहुंचेगी। यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे।
शीतकाल में कहां होंगे दर्शन
शीतकाल में मां गंगा के दर्शन मुखबा और मां यमुना के दर्शन खरसाली में होंगे। केदारनाथ धाम के शीतकालीन प्रवास के दौरान बाबा केदार की पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में होगी। बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने श्रद्धालुओं को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए धाम की मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की है। चारधाम कपाट बंद होने की तारीखों की खबर यहां पढ़ें
तुंगनाथ के कपाट पहले ही बंद
इससे पहले तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं। भगवान तुंगनाथ की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंच गई है, जहां अगले छह माह तक पूजा-अर्चना होगी। तुंगनाथ कपाट बंद होने की खबर भी पढ़ें

