सहरसा (बिहार)। कहते हैं कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो और कड़ी मेहनत का जज्बा हो, तो कोई भी आर्थिक तंगी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। बिहार के सहरसा जिले में एक साधारण किराना दुकानदार के तीन बच्चों ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। महंगी कोचिंग और बड़े शहरों के बिना ही इन तीन भाई-बहनों ने एक साथ नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पास कर पूरे देश के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल कायम की है।
प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं
सहरसा जिले के तुलसियाही गांव के रहने वाले किराना दुकानदार रोहित आनंद और उनकी पत्नी पूनम देवी के तीन बच्चों— रजनीश कुमार, साक्षी कुमारी और प्रह्लाद कुमार— ने यह उपलब्धि हासिल की है। इन तीनों ने दिखा दिया है कि सफलता के लिए कोटा या दिल्ली जैसी महंगी जगहों पर जाना ही जरूरी नहीं है, बल्कि सच्ची लगन से छोटे शहर में भी कामयाबी की इबारत लिखी जा सकती है।
तीनों भाई-बहनों का प्रदर्शन (एक नज़र में):
| नाम | रिश्ता | प्राप्त अंक (NEET) |
| रजनीश कुमार | बड़ा भाई | 633 अंक |
| साक्षी कुमारी | बहन | 601 अंक |
| प्रह्लाद कुमार | छोटा भाई | 565 अंक |
माता-पिता ने बताई थी असलियत
रोहित आनंद और पूनम देवी ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी से बता दिया था कि वे उन्हें नीट की तैयारी के लिए जिले से बाहर भेजने या महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। हालांकि, माता-पिता ने बच्चों को पूरा भरोसा दिलाया कि वे उनकी शिक्षा में मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
स्थानीय कोचिंग से की तैयारी
माता-पिता के सहयोग और मार्गदर्शन के बाद तीनों भाई-बहनों ने सहरसा के ही एक स्थानीय कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया। अपने गृहनगर में रहकर ही तीनों ने दिन-रात एक कर दिया और आखिरकार अपनी मेहनत से नीट जैसी कठिन परीक्षा को एक साथ क्रैक कर लिया। आज उनकी यह शानदार सफलता पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और देश भर के लाखों NEET उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का एक बहुत बड़ा स्रोत बन गई है।

