सील तोड़कर चल रहा था सेवा हॉस्पिटल, जच्चा-बच्चा की मौत के बाद संचालक पर मुकदमा
आखिर किसके सहारे पर सील तोड़कर प्रबंधक चला रहा था हॉस्पिटल
(सत्य प्रकाश सैनी)
सहसवान (बदायूं)।हरदत्तपुर रोड स्थित सेवा हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक हर्ष यादव उर्फ हरवेश कुमार पुत्र रामौतार सिंह निवासी अकबरपुर थाना गुन्नौर जनपद संभल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।आरोप है कि अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था और पूर्व में सील किए जाने के बावजूद सील व ताला हटाकर दोबारा मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने 26 मई 2026 को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अस्पताल को सील किया था।उस समय भी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी गई थी लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था।अस्पताल को सील कर दिए जाने के बावजूद संचालक द्वारा कथित रूप से सील और ताला हटाकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया।

घटना की सूचना पर तहसीलदार राकेश कुमार के नेतृत्व में राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों के उपचार को लेकर कई सवाल सामने आए।भर्ती मरीजों को अस्पताल से बाहर निकालकर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।एक मरीज नेक्सी पत्नी नत्थू निवासी नगला बरन को एंबुलेंस से सीएचसी भेजा गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं रेफर कर दिया गया।
सेवा हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा की मौत का यह पहला मामला नहीं है। 26 मई 2026 को भी इसी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हुई थी।उस घटना के बाद परिजनों के हंगामे पर तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक की ओर से पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई थी और स्वास्थ्य विभाग व तहसील प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था। इसके बावजूद अस्पताल का दोबारा संचालन शुरू होना और अब फिर जच्चा-बच्चा की मौत होना स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।चर्चा यह भी है दोनों ही जच्चा बच्चा की मौत की हुई घटनाओं में परिजनों द्वारा प्रबंधक से आर्थिक समझौता कर लिया गया जिसके कारण उपरोक्त परिवारों के परिजनों ने भी मुकदमा लिखाना तो दूर शवो का पोस्टमार्टम करना भी उचित नहीं समझाप्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रशांत त्यागी की तहरीर में आरोप लगाया गया है कि संचालक ने पूर्व में सील किए गए अस्पताल का ताला और सील हटाकर बिना वैध पंजीकरण व सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अस्पताल दोबारा संचालित किया। स्वयं को और अस्पताल को वैध एवं योग्य दर्शाकर मरीजों के साथ छल-धोखाधड़ी करने अवैध रूप से धन अर्जित करने तथा बिना आवश्यक चिकित्सीय योग्यता के उपचार कर मरीजों की जान को संकट में डालने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 125, 318(4), 319(2), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम की धारा 34(2) तथा चिकित्सा प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 11 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आखिर सेवा हॉस्पिटल का प्रबंधक किसके इशारे पर मुख्य मार्ग पर खुलेआम संचालन कर रहा था यह प्रश्न क्षेत्र की जनता की जुबान पर चर्चा का विषय बना हुआ।
संचालक पर पहले से भी मुकदमों की चर्चा सूत्रों के मुताबिक अस्पताल संचालक हरवेश कुमार उर्फ हर्ष यादव के खिलाफ पूर्व में भी कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।वर्ष 2025 में विनीता यादव की ओर से भी हरवेश कुमार उर्फ़ हर्ष यादव के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था।बताया जाता है कि विनीत यादव के पति दूध बेचने का काम करते थे। हालांकि इन पुराने मामलों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस अभिलेखों से होना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 26 मई को सील किए गए अस्पताल में दोबारा मरीजों का इलाज कैसे शुरू हो गया।यदि अस्पताल की सील तोड़ी गई थी तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को समय रहते क्यों नहीं हुई। अब जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल के संचालन के साथ-साथ सील किए गए परिसर की निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है।

