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कादरबाड़ी गांव में खसरा से सगे भाई-बहन की मौत, दस बच्चों सहित 11 संक्रमित

On: October 3, 2026 4:20 PM
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कादरबाड़ी गांव में खसरा से सगे भाई-बहन की मौत, दस बच्चों सहित 11 संक्रमित

बदायूं-कासगंज सीमा पर कादरबाड़ी गांव में खसरा की चपेट में आने से सगे भाई-बहन की मौत हो गई।23 सितंबर को सैजान (9 वर्ष) व 29 सितंबर को उसकी छह वर्षीय छोटी बहन सबरीन की मौत हो गई।गांव में दस बच्चों सहित 11 लोग संक्रमित हैं। टीकाकरण होने के बावजूद गांव में खसरा फैलने से स्वास्थ्य विभाग चिंतित है।

गांव में 10 दिन से खसरा फैला हुआ है।सैजान की मौत हुई तो ग्रामीणों ने इसकी सूचना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों को दी लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।इसके बाद में 29 सितंबर को खसरे से पीड़ित दूसरी बच्ची की भी मौत हो गई।सूचना पर आनन-फानन में बदायूं और कासगंज स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। यह गांव बदायूं और कासगंज जिले में पड़ता है।टीम ने गांव में लोगों की जांच की।खसरे के प्रारंभिक लक्षण मिलने पर पांच बच्चों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।अभी गांव में 11 लोग इसकी चपेट में हैं।बदायूं के सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि खसरा फैलने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव भेजा गया। पीड़ित बच्चों को दवा दी गई है।गांव में स्थिति नियंत्रण में है।जिन दो बच्चों की मौत हुई है,उनका घर कासगंज में पड़ता है।

शासन तक पहुंचा सीमा विवाद बाद में कासगंज में दर्ज हुई मौत:-इस्माइल के दो बच्चों की मौत के बाद बदायूं व कासगंज के स्वास्थ्य अफसरों के बीच मामला सीमा विवाद पर अटक गया। मौत किस तरफ दर्ज की गई, इसको लेकर उच्चाधिकारियों ने मामला शासन तक पहुंचाया है। इस्माइल का पता आधार कार्ड पर बदायूं के ब्लॉक कादरचौक के गांव कादरबाड़ी का दर्ज है। ऐसे में उनके दोनों बच्चों की मौत कहां दर्ज की जाए, इस पर शासन ने हस्तक्षेप किया।इसके बाद इस्माइल के बच्चों की मौत को स्वास्थ्य विभाग ने कासगंज का माना,क्योंकि जब बीमारी फैली, तब बच्चे कासगंज के गांव में मौजूद थे।

बाढ़ में जाटी गांव कटा तो यहां आकर बस गए ग्रामीण:-नूर मोहम्मद के अनुसार करीब 14 साल पहले उसहैत क्षेत्र में गंगा नदी की बाढ़ में उनका गांव जाटी कट गया था।इसके बाद वहां रहने वाले लोग कादरबाड़ी में आकर बस गए।गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर कादरचौक कस्बा है।ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरत का सामान, खाद्य सामग्री,कपड़े और दवाएं कादरचौक से ही लेते हैं।ग्रामीणों के अनुसार,उन्होंने यहां जमीन खरीदी तो उसकी रजिस्ट्री कासगंज जिले में कराई गई। सकरे आलम और मुकीम ने बताया कि उनका गांव आधा कासगंज और आधा बदायूं में पड़ता है। यही वजह है कि गांव की सीमा को लेकर दोनों जिलों के बीच स्थिति साफ नहीं है।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी 

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