समर इंडिया संवाददाता: जावेद चौधरी
हसनपुर। 15 अक्टूबर 2026 से 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) लेनदेन पर प्रस्तावित एमडीआर (MDR – मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था के विरोध में व्यापारी लामबंद होने लगे हैं। गुरुवार को हसनपुर तहसील में ‘व्यापारी सुरक्षा फोरम संस्थान 74/22’ के बैनर तले व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम हिमांशु उपाध्याय को सौंपा, जिसमें इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
डिजिटल इंडिया में व्यापारियों का सहयोग ज्ञापन सौंपते हुए व्यापारियों ने कहा कि देश में डिजिटल भुगतान को जन-जन तक पहुंचाने में यूपीआई ने क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। इससे आम नागरिकों, ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए लेन-देन की प्रक्रिया आसान, तेज और पारदर्शी हुई है। व्यापारी वर्ग लगातार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने में अपना पूरा सहयोग दे रहा है, लेकिन प्रस्तावित शुल्क से इस मुहिम को झटका लग सकता है।
व्यापारियों ने जताई ये प्रमुख चिंताएं:
छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ: एमडीआर का अतिरिक्त चार्ज छोटे, मध्यम और फुटकर व्यापारियों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन जाएगा, जिससे उनका मुनाफा सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
महंगाई और ग्राहकों पर असर: व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि इस अतिरिक्त लागत का अंतिम भार सामान और सेवाओं की बढ़ी हुई कीमतों के रूप में ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा।
प्रतिस्पर्धा में नुकसान: इस तरह के शुल्क से बाजार में छोटे व्यापारियों की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कमजोर होगी।
व्यापारी संगठनों की मुख्य मांगें:
यूपीआई भुगतान को पूरी तरह से एमडीआर (MDR) मुक्त रखा जाए।
छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाए।
प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने से पहले सरकार प्रमुख व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत करे।
ज्ञापन सौंपने वालों में ये रहे मौजूद इस मौके पर मुख्य रूप से जिला संगठन मंत्री सचिन गुप्ता, राहुल गुप्ता, लोकेश अग्रवाल, पंकज भटनागर, अमरीश कुमार, विशाल वर्मा, ज्योति गर्ग, मुकेश गुप्ता और मुकुल कुमार समेत बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी उपस्थित रहे।

