**फ्रोजन शोल्डर में समय पर उपचार जरूरी, योग व फिजियोथेरेपी से कंधे की गतिशीलता में सुधार संभव**
**कंधे के दर्द और जकड़न को नजरअंदाज न करें : डॉ. अमोल गुप्ता**
सहसवान। कंधे में लगातार दर्द, जकड़न और हाथ को ऊपर उठाने या पीठ के पीछे ले जाने में परेशानी को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण **फ्रोजन शोल्डर (Adhesive Capsulitis)** के हो सकते हैं। समय पर चिकित्सकीय जांच और उचित rehabilitation से कंधे की गतिशीलता तथा दैनिक कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है।
डॉ. अमोल गुप्ता, होम्योपैथिक फिजिशियन एवं क्रॉनिक एंड स्किन डिजीजेज विशेषज्ञ, डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल, सहसवान** ने बताया कि फ्रोजन शोल्डर में कंधे के जोड़ के आसपास की कैप्सूल में सूजन और जकड़न के कारण दर्द तथा कंधे की movement सीमित हो जाती है। मरीजों को कपड़े पहनने, बाल बनाने, हाथ ऊपर उठाने और पीठ के पीछे हाथ ले जाने में परेशानी हो सकती है। कई मरीजों में रात के समय दर्द अधिक महसूस होता है।
### **फिजियोथेरेपी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा**
फ्रोजन शोल्डर में फिजियोथेरेपी का प्रमुख उद्देश्य दर्द को ध्यान में रखते हुए कंधे की **Range of Motion** को धीरे-धीरे बढ़ाना और कार्यक्षमता बनाए रखना है। फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में **Pendulum Exercise, Wall Walking, हल्की Stretching, Shoulder Flexion तथा Rotation Exercises** कराई जा सकती हैं।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि तेज दर्द के दौरान कंधे को जोर से खींचना या अत्यधिक व्यायाम करना उचित नहीं है। व्यायाम की तीव्रता मरीज की अवस्था के अनुसार धीरे-धीरे बढ़ाई जानी चाहिए।
### **योग से mobility और flexibility बनाए रखने में मदद**
कंधे की स्थिति के अनुसार हल्के और नियंत्रित योगाभ्यास भी rehabilitation का हिस्सा हो सकते हैं। **ताड़ासन में नियंत्रित हाथों की गति, सरल Shoulder Rotation, हल्की भुजा stretching तथा संशोधित योगाभ्यास** मरीज की क्षमता के अनुसार किए जा सकते हैं।
योग का उद्देश्य कंधे को जोर से खींचना नहीं, बल्कि **धीमी, नियंत्रित और दर्द की सहनीय सीमा के भीतर movement** बनाए रखना होना चाहिए। तीव्र दर्द, हाल की चोट या ऑपरेशन के बाद योग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।
### **होम्योपैथी में लक्षणानुसार इन औषधियों पर किया जाता है विचार**
डॉ. अमोल गुप्ता के अनुसार होम्योपैथी में मरीज के **व्यक्तिगत लक्षण, दर्द की प्रकृति, stiffness, movement की सीमा और अन्य संबंधित लक्षणों** के आधार पर औषधि का चयन किया जाता है। फ्रोजन शोल्डर से जुड़े musculoskeletal symptoms में होम्योपैथिक चिकित्सक विभिन्न औषधियों पर विचार कर सकते हैं, जिनमें **Rhus Toxicodendron, Bryonia Alba, Arnica Montana, Ruta Graveolens, Causticum, Sanguinaria Canadensis, Ferrum Metallicum और Kali Muriaticum** आदि के नाम प्रचलित हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि **इनमें से कोई एक औषधि प्रत्येक मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती**। दवा का चयन योग्य चिकित्सक द्वारा व्यक्तिगत clinical assessment के आधार पर किया जाना चाहिए। साथ ही आवश्यक होने पर conventional medical evaluation, pain management और physiotherapy को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
### **मधुमेह रोगियों में जोखिम अधिक**
डॉ. गुप्ता ने बताया कि **मधुमेह से पीड़ित लोगों में फ्रोजन शोल्डर की समस्या अधिक देखी जा सकती है**। इसलिए ऐसे लोगों को कंधे में लगातार दर्द या जकड़न होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, **“फ्रोजन शोल्डर में उपचार का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि कंधे की गतिशीलता और कार्यक्षमता को धीरे-धीरे बेहतर करना है। चिकित्सकीय देखरेख में फिजियोथेरेपी, सुरक्षित exercise और मरीज की क्षमता के अनुसार योगाभ्यास rehabilitation में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।”**
### **बचाव के लिए कंधे को सक्रिय रखें**
लंबे समय तक कंधे को पूरी तरह स्थिर रखना जकड़न को बढ़ा सकता है। चोट या ऑपरेशन के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उचित समय पर नियंत्रित movement और rehabilitation शुरू करना महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि, सही posture और कंधे की सुरक्षित mobility बनाए रखना भी उपयोगी है।
चोट के बाद अचानक बहुत तेज दर्द, हाथ में कमजोरी या सुन्नपन, स्पष्ट सूजन अथवा हाथ बिल्कुल न उठ पाने की स्थिति में स्वयं उपचार करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। कंधे के हर दर्द को फ्रोजन शोल्डर मानना उचित नहीं है, क्योंकि अन्य orthopedic समस्याओं के लक्षण भी मिलते-जुलते हो सकते हैं।

