Amroha News : अमरोहा, उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के माननीय उपाध्यक्ष श्री महेश कुमार शुक्ल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में जनपद के गौ आश्रय स्थलों एवं गौवंश संरक्षण कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक के प्रारंभ में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने उन्हें पौधा भेंट कर स्वागत किया।
बैठक को संबोधित करते हुए माननीय उपाध्यक्ष ने कहा कि गौ सेवा भारतीय संस्कृति, मानवता और संवेदनशील समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में निराश्रित एवं असहाय गौवंश के संरक्षण, भरण-पोषण और समुचित देखभाल के लिए पूरी संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री जी के के दूरदर्शी एवं प्रभावी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार गौ सेवा को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में देख रही है। उन्होंने लोगों से गौशालाओं से गौवंश लेकर उनका पालन-पोषण करने तथा उन्हें निराश्रित न छोड़ने का आह्वान किया।
समीक्षा के दौरान उन्होंने जनपद के सभी गौ आश्रय स्थलों, नामित नोडल अधिकारियों तथा उनके निरीक्षण कार्यों की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने नोडल अधिकारियों से गौशाला में संरक्षित गौवंश की संख्या, पशु चिकित्सकों की उपलब्धता, ग्राम प्रधान, स्थान एवं अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि गौ संरक्षण माननीय मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी नोडल अधिकारी नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण करें तथा जहां भी कमियां मिलें, उनका तत्काल निराकरण कर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाए।
उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि सभी नोडल अधिकारियों की नियमित बैठक कर उनकी जिम्मेदारियों की समीक्षा की जाए तथा उन्हें गौ संरक्षण कार्यों के प्रति और अधिक उत्तरदायी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी प्रशासनिक दायित्व के साथ-साथ सेवा भावना से भी इस कार्य को करें।
माननीय उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री सहभागिता योजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा अधिक से अधिक लोगों को गौवंश पालने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत गौवंश का पालन कर रहे लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।
बैठक में निर्माणाधीन गौशालाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। चारागाह भूमि के संबंध में जानकारी लेते हुए निर्देशित किया कि सभी चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा वहां नेपियर घास की बुवाई कराई जाए, जिससे गौवंश को पर्याप्त एवं पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध हो सके।
उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों एवं अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीमार गौवंश को अलग रखने की समुचित व्यवस्था की जाए तथा उनका समयबद्ध उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रत्येक गौशाला में स्वच्छ पेयजल, हरा चारा, पशु आहार, भूसा तथा आवश्यक पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहें। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को गौशालाओं के संचालन एवं रखरखाव से जोड़ने के भी निर्देश दिए।
माननीय उपाध्यक्ष ने गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता के लिए सभी गौ आश्रय स्थलों पर भूसा भंडारण, क्रय-विक्रय, दान स्टॉक एवं अन्य आवश्यक अभिलेख सुव्यवस्थित रखने तथा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24×7 निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस विभाग से वर्ष 2017 से अब तक गौ तस्करों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराने को भी कहा।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री का स्पष्ट संकल्प है कि निराश्रित गौवंश की सेवा एवं संरक्षण में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। सभी अधिकारी गौ संरक्षण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। कृषि एवं पशुपालन को परस्पर सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
बैठक में बिना पूर्व सूचना अनुपस्थित अधिकारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आगामी 12 जुलाई को आयोजित होने वाले “एक पेड़ मां के नाम” महाअभियान के अंतर्गत प्रत्येक गौशाला परिसर में पौधरोपण कराने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने माननीय उपाध्यक्ष जी का आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का समयबद्ध एवं शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य श्री दीपक गोयल, मुख्य विकास अधिकारी श्री अश्वनी कुमार मिश्र, अपर निदेशक (ग्रेड-2) पशुपालन विभाग, मुरादाबाद मंडल डॉ. जगदीश प्रसाद, परियोजना निदेशक श्री अंबरीश कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आभा दत्त, समस्त खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
……

