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पिथौरागढ़ में कुदरत का कहर: पहाड़ी दरकने से रामगंगा नदी पर बनी 600 मीटर लंबी झील, 700 लोगों की जान पर बड़ा खतरा!

On: July 7, 2026 9:34 PM
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून की बारिश लगातार भयानक आपदाओं को जन्म दे रही है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां भारी भूस्खलन (पहाड़ी दरकने) के कारण रामगंगा नदी का रास्ता पूरी तरह से ब्लॉक (अवरुद्ध) हो गया है। मलबे के कारण नदी का बहाव रुकने से वहां करीब 600 मीटर लंबी एक विशालकाय कृत्रिम झील बन गई है, जिसने निचले इलाकों में भारी तबाही की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

600 मीटर लंबी झील बनी ‘टाइम बम’ प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिथौरागढ़ के उच्च हिमालई क्षेत्र में अचानक एक विशाल पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक कर सीधे रामगंगा नदी में आ गिरा। भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा गिरने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया और पीछे की तरफ पानी जमा होने लगा। देखते ही देखते इस जमा पानी ने करीब 600 मीटर लंबी एक गहरी झील का रूप ले लिया। यह झील अब इलाके के लिए एक ‘टाइम बम’ की तरह बन गई है, क्योंकि अगर मलबे का यह बांध अचानक टूटता है, तो नीचे भयंकर बाढ़ आ सकती है।

700 लोगों की जान पर खतरा, कई गांव दहशत में रामगंगा नदी पर इस खतरनाक झील के बनने से नदी के निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों में बसे गांवों पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, अगर झील का पानी अचानक बेकाबू होकर नीचे आता है, तो करीब 700 लोगों की जान और संपत्ति को सीधा खतरा हो सकता है। इस खतरे को देखते हुए ग्रामीण बेहद खौफजदा हैं और रात-रात भर जागकर नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

अस्थायी पुल बहे, संपर्क कटा पहाड़ी से गिरे मलबे और पानी के बढ़ते दबाव के कारण नदी पर बने कई अस्थायी लकड़ी के पुल और ट्रॉली संपर्क मार्ग पानी में बह गए हैं। पुल बहने से नदी पार के दर्जनों गांवों का मुख्य संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे वहां राशन और आपातकालीन सुविधाओं का भी संकट पैदा हो गया है।

प्रशासन हाई अलर्ट पर, रेस्क्यू टीमें मुस्तैद इस गंभीर प्राकृतिक आपदा की सूचना मिलते ही पिथौरागढ़ जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), NDRF और स्थानीय पुलिस की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले सभी लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सख्त हिदायत दी है। साथ ही, झील के मुहाने (मलबे) को सावधानीपूर्वक खोलने और पानी की निकासी के लिए विशेषज्ञों की टीम भी मौके पर भेजी जा रही है।

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