अयोध्या : भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद देश-दुनिया से करोड़ों भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार खुले दिल से दान कर रहे हैं। लेकिन आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र में एक ऐसी सेंधमारी हुई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। बहुचर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी को गुरुवार शाम को ही हिरासत में ले लिया गया था, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती बरती।
दरअसल, राम जन्मभूमि थाने में इन सभी आरोपियों से पूरी रात कड़ाई से पूछताछ की गई। पुलिस के आला अधिकारियों ने दान के पैसों के गबन से जुड़े कई अहम सवाल दागे, जिसके बाद शुक्रवार सुबह आधिकारिक तौर पर इनकी गिरफ्तारी दिखा दी गई है। बताया जा रहा है कि आज ही पुलिस इन सभी को कोर्ट में पेश करेगी, जहां से आगे की रिमांड मांगी जा सकती है ताकि इस बड़े फर्जीवाड़े के और भी तार खंगाले जा सकें।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का मास्टरमाइंड कौन है?
इस पूरे प्रकरण की अब तक की जो परतें खुली हैं, उनमें सबसे चौंकाने वाला नाम रमाकांत उर्फ टिन्नू यादव का सामने आया है। पुलिस की जांच में यह बात शीशे की तरह साफ हो गई है कि चढ़ावे की रकम में सबसे बड़ी हेराफेरी इसी शख्स ने की है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मंदिर में आने वाले दान की पेटियों की चाबियां टिन्नू के ही पास रहती थीं। मंदिर परिसर में किसे नौकरी मिलेगी, कैश गिनने के काम में कौन शामिल होगा और यहां तक कि सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी कहां लगेगी, इसका अंतिम फैसला भी टिन्नू ही करता था। एक तरह से मंदिर परिसर में उसका ही हुक्म चलता था।
असल में, टिन्नू यादव की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक वक्त था जब टिन्नू के पिता चाय की दुकान चलाते थे और वह खुद अयोध्या की सड़कों पर ऑटो चलाता था। फिर उसकी किस्मत पलटी और वह राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर बन गया। कुछ ही समय में उसने ऐसा भरोसा जीता कि मंदिर प्रबंधन की ज्यादातर अहम जिम्मेदारियां उसे ही सौंप दी गईं। आज हालत यह है कि कभी चंद रुपयों के लिए ऑटो चलाने वाला यह शख्स अयोध्या और लखनऊ में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का मालिक है। एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का आलीशान हॉस्टल, अयोध्या के कई रेस्तरां व होटलों में पार्टनरशिप और लग्जरी गाड़ियां उसकी इस ‘कमाई’ की गवाही दे रही हैं।
कैसे होता था खेल और किन लोगों की हुई गिरफ्तारी?
इस बड़े फर्जीवाड़े में टिन्नू यादव अकेला नहीं था, बल्कि उसने बकायदा अपनी एक पूरी फौज तैयार कर रखी थी। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अन्य सात आरोपियों में सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा के नाम शामिल हैं। ये सभी दान की रकम की गिनती से सीधे तौर पर जुड़े हुए लोग हैं।
यह पूरा गिरोह एक सुनियोजित सिस्टम के तहत काम कर रहा था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से छह कैशियर के पद पर तैनात थे। इन सभी कैशियरों के काम की निगरानी सुभाष श्रीवास्तव करता था, जबकि मास्टरमाइंड टिन्नू पूरे कैश की काउंटिंग को सुपरवाइज करने से लेकर उसे बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने का जिम्मा संभालता था। इसी जिम्मेदारी की आड़ में लंबे समय से भगवान के दरबार में सेंध लगाई जा रही थी।
एसआईटी जांच और आगे की कार्रवाई
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया था। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद ही राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने नामजद तहरीर दी थी। इसी शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने बिना कोई देरी किए एक्शन लिया।
लाखों-करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले ने मंदिर प्रबंधन की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबकी निगाहें कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। पुलिस रिमांड में टिन्नू यादव और उसके गुर्गों से होने वाली पूछताछ में यह साफ हो सकेगा कि दान चोरी का यह खेल कितने महीनों से चल रहा था और क्या इसमें कुछ और सफेदपोश चेहरे भी शामिल हैं।

