अमरोहा। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ के तहत इस वर्ष अमरोहा जिले में 800 गरीब कन्याओं के विवाह का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर आयोजन शुरू किए जाएंगे। अमरोहा की जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुड़ी जैन ने बताया कि योजना के तहत सरकार प्रति जोड़े एक लाख रुपये खर्च करती है, जिसमें से 60 हजार रुपये सीधे वधु के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। हालांकि, इस बार विभाग फर्जीवाड़े को लेकर बेहद सख्त है।
हर तीन माह में 200 जोड़ों का होगा विवाह
अमरोहा जिले को इस साल 800 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य शासन से प्राप्त हुआ है। जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुड़ी जैन के मुताबिक, इस लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए हर तीन महीने में 200 शादियों का खाका तैयार किया गया है। जिले में सबसे ज्यादा आवेदन हसनपुर गंगेश्वरी ब्लॉक क्षेत्र से प्राप्त हो रहे हैं। फिलहाल इस वर्ष का पहला आयोजन होना बाकी है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। टेंडर पास होते ही भव्य स्तर पर सामूहिक विवाह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के जोड़े लगभग समान संख्या में पूरी आस्था और रीति-रिवाज के साथ हिस्सा लेते हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए कड़े मानक तय
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाने के लिए शासन ने स्पष्ट मानक निर्धारित किए हैं। इसके तहत लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक होनी अनिवार्य है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि यह दोनों का पहला विवाह हो। इसके अलावा, लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना का लाभ लेने में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सबसे आगे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों के लोग सामूहिक विवाह के बजाय निजी तौर पर शादियां करना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों की भागीदारी अधिक रहती है। ग्रामीण क्षेत्र के जो लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, वे भी पंचायत सचिव या जन सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
त्रिस्तरीय सत्यापन और मंडप में होगा बायोमेट्रिक
विगत वर्षों में सामने आए फर्जीवाड़े के मामलों से सबक लेते हुए त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था लागू की गई है। सबसे पहले ग्राम स्तर पर पंचायत सचिव सत्यापन करता है, उसके बाद बीडीओ स्तर पर सीडीपीओ या एडीओ जांच करते हैं। यदि एक ही गांव से 5 या 10 से अधिक आवेदन आते हैं, तो जिला स्तरीय अधिकारी मौके पर जाकर क्रॉस चेक करते हैं। इसके बावजूद अगर कोई गड़बड़ी की गुंजाइश बच जाती है, तो विवाह स्थल पर ही दूल्हा-दुल्हन का बायोमेट्रिक (आईरिस और फिंगरप्रिंट) स्कैन किया जाता है। यदि मंडप में कोई भी फर्जी मामला पकड़ में आता है, तो तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाती है और गलत सत्यापन करने वाले सचिव को सस्पेंड कर दिया जाता है। पिछले वर्ष विभाग ऐसे ही एक मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए सचिव को निलंबित कर चुका है।
शादी के एक से दो सप्ताह के भीतर खाते में आएगी रकम
योजना के तहत मिलने वाली एक लाख रुपये की कुल धनराशि का पारदर्शी तरीके से बंटवारा किया गया है। इसमें से 15 हजार रुपये आयोजन (टेंट, भोजन, पंडित या मौलवी, सजावट) पर खर्च होते हैं। 25 हजार रुपये का गृहस्थी का सामान जोड़ों को उपहार स्वरूप दिया जाता है और मुख्य राशि 60 हजार रुपये वधु के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। विवाह संपन्न होने के बाद लाभार्थियों की सूची जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा स्वीकृत की जाती है। इसके बाद उस स्वीकृत सूची को विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में महज एक से दो सप्ताह का समय लगता है और धनराशि सुरक्षित तरीके से सीधे लड़की के बैंक खाते में पहुंच जाती है।

