Amroha News-अमरोहा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में कार्यरत निविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने लगा है। कर्मचारियों की लगातार हो रही दुर्घटनाओं, सुरक्षा की कमी और कम वेतन के विरोध में उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ (अमरोहा जिला इकाई) ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित कर्मचारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी प्रमुख समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई है।
हादसों में जा रही कर्मचारियों की जान प्रदर्शन के दौरान संघ ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। संघ का कहना है कि प्रबंधन अपने ही आदेशों और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहा है। विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिसके चलते कार्यरत कर्मियों पर काम का अतिरिक्त और जानलेवा बोझ बढ़ गया है।
हाल ही में अप्रैल और मई 2026 के बीच, नियमों को ताक पर रखकर काम कराए जाने के कारण कई गंभीर दुर्घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में कई आउटसोर्स कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हो गए हैं।
जोखिम भरा काम, लेकिन नहीं मिल रहा समान वेतन कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मियों से लाइनमैन जैसा तकनीकी और बेहद जोखिम भरा काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें ना तो सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) दिए जा रहे हैं और ना ही समान काम के लिए समान वेतन मिल रहा है। विभाग की इस लापरवाही और कर्मियों की कमी का सीधा असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ रहा है, जिससे आम उपभोक्ता भी भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
संघ की प्रमुख मांगें: मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में संविदा कर्मचारियों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
सभी आउटसोर्स/संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम 18,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए।
कार्य के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य किए जाएं।
पूर्व में कार्य से हटाए गए (निष्कासित) सभी कर्मचारियों की तुरंत सेवा बहाली की जाए।
संविदा कर्मचारियों के लिए 60 वर्ष तक की सेवा सुनिश्चित की जाए।
क्या बोले जिलाध्यक्ष? इस मौके पर उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष विपिन कुमार ने कहा, “हम अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेश की जनता को रोशन कर रहे हैं, लेकिन हमारे परिवारों का भविष्य अंधकार में है। यदि सरकार और प्रबंधन ने हमारी 18 हजार रुपये वेतन, सुरक्षा और हटाए गए कर्मियों की बहाली की मांग जल्द पूरी नहीं की, तो हम उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।”

