Amroha News: गजरौला (अमरोहा) : जनपद अमरोहा के गजरौला क्षेत्र में भूजल (Groundwater) के जहरीले होने और औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। नेशनल हाईवे-9 (NH-9) के किनारे नाईपुरा-सवाजपुर डोर गांव में भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) का अनिश्चितकालीन धरना 148वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा।
आंदोलन को धार देने के लिए धरने में पहुंचे भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष इकबाल सैफी ने स्थानीय फैक्ट्रियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए 24 मई 2026 को एक बड़े आर-पार के आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
फैक्ट्रियों पर केमिकल युक्त पानी जमीन में डालने का गंभीर आरोप
धरनास्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष इकबाल सैफी ने कहा कि गजरौला क्षेत्र का भूजल अब पूरी तरह से जहरीला हो चुका है।
किसानों का सीधा आरोप है कि इलाके की कुछ फैक्ट्रियां बोरवेल के जरिए अपना खतरनाक केमिकल युक्त पानी सीधे जमीन के अंदर डाल रही हैं।
इस जहरीले पानी के कारण इलाके में कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, जिससे आम जनता और किसानों की जान पर बन आई है।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
किसानों ने प्रशासन और सरकार के सामने अपनी कई प्रमुख मांगें रखी हैं:
स्वास्थ्य सुविधाएं: प्रशासन इलाके में फैल रही बीमारियों की निष्पक्ष जांच कराए और प्रभावित लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करे।
शुद्ध पानी: पीने और खेतों की सिंचाई के लिए तत्काल शुद्ध पानी की व्यवस्था की जाए।
मुआवजा: फसल के नुकसान की भरपाई हो और जहरीले पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
स्थानीय रोजगार: इलाके की सभी औद्योगिक इकाइयों में 80 फीसदी नौकरियां स्थानीय युवाओं को दी जाएं।
अन्य मांगें: फैक्ट्रियों द्वारा बंद किए गए खेतों के पारंपरिक रास्ते खुलवाए जाएं और इलाके के तालाबों में शुद्ध पानी भरवाकर भूजल स्तर (Water Level) सुधारा जाए।
24 मई को जुबिलेंट फैक्ट्री पर ‘महापंचायत’ और तालाबंदी की चेतावनी
किसान नेताओं ने स्पष्ट रूप से ऐलान किया है कि यदि प्रशासन ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आगामी 24 मई 2026 को जुबिलेंट फैक्ट्री के सामने (नाईपुरा पुल के नीचे) एक विशाल ‘महापंचायत’ का आयोजन किया जाएगा।
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष इकबाल सैफी ने प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन को खुली चेतावनी देते हुए कहा:
“148 दिन से किसान अपनी जान बचाने के लिए धरने पर बैठे हैं। विकास के नाम पर फैक्ट्रियों ने गजरौला को सिर्फ विनाश परोसा है। अब यह अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा। अगर 24 मई तक हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम जुबिलेंट फैक्ट्री की तालाबंदी करेंगे। जब तक पानी शुद्ध नहीं होगा, फैक्ट्री को चलने नहीं दिया जाएगा।”
इस चेतावनी के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। अब देखना यह है कि 24 मई से पहले किसानों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

