देहरादून : आगामी चुनावों के मद्देनजर उत्तराखंड निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) को पूरी तरह से पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने में जुट गया है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की विस्तृत समीक्षा की।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम: तुरंत निपटाएं सभी पेंडिंग फॉर्म
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आगामी एक सप्ताह के भीतर हर हाल में मतदाता सूची से संबंधित फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ना), फॉर्म 7 (नाम हटाना) और फॉर्म 8 (संशोधन) का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। समीक्षा बैठक में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों (DEOs) ने दावे और आपत्तियों के निस्तारण पर अब तक की गई कार्रवाई और शेष मामलों की सुनवाई को लेकर जिलेवार विस्तृत प्रेजेंटेशन (प्रस्तुतीकरण) दिया।
24.30 लाख को मिला था नोटिस, 1.10 लाख वोटर्स को दूसरा मौका
समीक्षा बैठक में मतदाता सूची को लेकर कई अहम आंकड़े सामने रखे गए:
पूरे प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 71 लाख 33 हजार मतदाता शामिल हैं।
इनमें से ‘अनमैप्ड’ (Unmapped) और विसंगतियों वाले कुल 24 लाख 30 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया गया था।
प्रशासन अब तक 23 लाख मतदाताओं की आपत्तियों की सुनवाई पूरी कर चुका है।
लगभग 1 लाख 10 हजार मतदाता ऐसे हैं, जो किसी कारणवश सुनवाई के लिए नहीं पहुंच सके।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी 1.10 लाख मतदाताओं को पुनः सुनवाई का एक और अवसर दिया गया है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल होने से न छूटे।
समयबद्ध और नियमानुसार हो सुनवाई
डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि मतदाताओं के सभी दावों और आपत्तियों की सुनवाई पूरी तरह से समयबद्ध और नियमानुसार की जाए। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित प्रदेश के सभी जिलाधिकारी वर्चुअली उपस्थित रहे।

