कैबिनेट का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने 27 अक्टूबर, 2026 को चार सरकारी अस्पतालों को 30 साल के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी संचालकों को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन चार अस्पतालों में कुल 900 बेड की सुविधा होगी, जो माध्यमिक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं देंगे।
किन जिलों के अस्पताल
इस योजना में अंबेडकर नगर के टांडा स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (200 बेड) और बरेली का जॉइंट हॉस्पिटल (300 बेड) शामिल हैं। इसके अलावा बांदा और चित्रकूट के अस्पताल भी इस योजना का हिस्सा हैं। चारों अस्पतालों को मिलाकर कुल 900 बेड की क्षमता होगी। निजी संचालक इन अस्पतालों को सुसज्जित करेंगे, वित्त देंगे, संचालन करेंगे, रखरखाव करेंगे और 30 साल बाद सरकार को वापस सौंपेंगे।
मरीजों को क्या फायदा
इन जिलों में अभी दिल का दौरा या सिर की गंभीर चोट जैसे मामलों में मरीजों को इलाज के लिए 150 से 200 किलोमीटर दूर लखनऊ, कानपुर या प्रयागराज जाना पड़ता है। PPP मॉडल से इन जिलों में ही उन्नत इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इससे जिला स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा और मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा।
निगरानी और शर्तें
सरकार का कहना है कि निजी संचालकों को तय मानकों के अनुसार सेवाएं देनी होंगी और सरकार की निगरानी बनी रहेगी। इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आगे और जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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