मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के रवैये पर तीखे सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग नागरिकों को सिर्फ इसलिए मताधिकार से वंचित कर सकता है, क्योंकि उन्होंने SIR के दौरान गणना फॉर्म जमा नहीं किया।
कोर्ट के सामने अहम सवाल
पीठ के सामने कई बुनियादी सवाल उठे: क्या गणना फॉर्म जमा न करने की विफलता मौजूदा मतदाता को सूची से हटाने का औचित्य हो सकती है? क्या जिन मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें नए पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के जरिए दोबारा आवेदन करना चाहिए? क्या अस्थायी रूप से अपने पंजीकृत पते से अनुपस्थित मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित माना जा सकता है? और क्या चुनाव आयोग “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” जैसी श्रेणी का इस्तेमाल कर मौजूदा सूचियों से नाम हटा सकता है?
Supreme Court SIR electoral rolls: चुनाव से जुड़ी खबरें
कर्नाटक में 64.5 लाख मतदाताओं का अनुमान
सुनवाई के दौरान कर्नाटक में पुनरीक्षण के बाद संभावित रूप से गायब मतदाताओं की संख्या पर भी चिंता जताई गई। एक विश्लेषण में जनसंख्या अनुमानों और मतदाता सूची के आंकड़ों के आधार पर करीब 64.5 लाख मतदाताओं के छूटने का अनुमान लगाया गया है, जिनमें युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी काफी है। यह जनसंख्या अनुमानों पर आधारित एक आकलन है, न कि यह न्यायिक निष्कर्ष कि सभी को अवैध रूप से हटाया गया।
BJP की आज 3 बजे बैठक
इसी बीच BJP गुरुवार दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में बैठक कर SIR अभियान की तैयारियों और प्रगति की समीक्षा करेगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और अश्विनी वैष्णव समेत अभियान से जुड़े वरिष्ठ नेता इसमें शामिल होंगे। बैठक में विपक्षी दलों के SIR पर विरोध का मुकाबला करने की रणनीति पर भी चर्चा होगी।
इससे पहले BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों के साथ बैठक की, जिसमें UP प्रभारी स्मृति ईरानी, MP प्रभारी बिप्लब कुमार देब और गुजरात प्रभारी तरुण चुग मौजूद रहे।
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