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Supreme Court मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून पर करेगा सुनवाई

On: April 20, 2025 7:29 AM
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Supreme Court
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नयी दिल्ली : Supreme Court ने बुधवार को कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से संबंधी कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले महीने की 14 तारीख को सुनवाई करेगा।

Supreme Court वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बुधवार को करेगा सुनवाई

न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर 14 मई, 2025 को सुनवाई करने पर सहमति जताई। पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता एनजीओ- एडीआर की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुनवाई के लिए अनुरोध किया।

याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून की वैधता को चुनौती दी। इस कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित चयन समिति शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश से हटा दिया गया है।

शीर्ष अदालत के समक्ष श्री भूषण ने कहा कि यह चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को चुनौती देने का मामला है, वह एक घंटे से ज्यादा समय नहीं लेंगे। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 2023 का कानून प्रभावी रूप से शीर्ष अदालत के पिछले फैसले को कमजोर करता है जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश का एक स्वतंत्र चयन समिति का गठन अनिवार्य किया गया था। इसके बजाय, नए कानून ने मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को जगह दी गई है, जिससे चुनाव आयोग पर कार्यपालिका के प्रभुत्व के बारे में चिंताएँ बढ़ गईं।

केंद्र ने दिसंबर 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 को अधिनियमित किया।

Supreme Court जिस तरह से सरकार नियुक्तियों में तेजी ला रही है, वह ‘अनावश्यक और टालने योग्य’ है

‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ मामले में संविधान पीठ के फैसले ने मार्च, 2023 में घोषित किया था कि सीईसी और ईसी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की सलाह पर की जाएगी, जब तक कि इस संबंध में कोई कानून नहीं बन जाता।

Supreme Court  ने इससे पहले 21 मार्च, 2024 को सीईसी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नए कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। तब Supreme Court ने कहा था कि जिस तरह से सरकार नियुक्तियों में तेजी ला रही है, वह ‘अनावश्यक और टालने योग्य’ है, लेकिन वह कानून पर रोक नहीं लगा सकता, क्योंकि इससे केवल अराजकता और अनिश्चितता ही पैदा होगी।

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