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Shani Jayanti Upay : 1शनि जयंती पर बन रहा है अद्भुत संयोग, सिर्फ एक दीपक और ये 5 उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत

On: May 15, 2026 9:12 PM
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Shani Jayanti Upay
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Shani Jayanti 2026 Upay: इस साल शनि जयंती का पर्व 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। इस बार शनि जयंती का महत्व इसलिए और बढ़ गया है, क्योंकि 13 साल बाद अदुभुत संयोग बन रहा है। ज्योतिष के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या पर आने वाले इस पर्व पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं। अगर आप इस दिन व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो कुछ विशेष उपायों को करके भी शनि भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

13 साल बाद बना खास संयोग

इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है। ज्योतिष के अनुसार, यह दुर्लभ संयोग करीब 13 साल बाद बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बुद्धादित्य योग का निर्माण हो रहा है। वहीं, गजकेसरी योग, महापुरुष योग और सौभाग्य योग का संयोग भी इस दिन को बेहद शुभ बना रहा है।

क्यों खास मानी जाती है शनि जयंती

शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते हैं, उन्हें न्याय का देवता कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शनि पूजा शनि दोष से राहत दिलाती है। इस दिन शनिदेव को नीले फूल अर्पित करने का विशेष महत्व है।

व्रत न रख पाएं तो करें ये 5 काम
1. 4 बाती वाला सरसों तेल का दीया

शाम को शनिदेव की प्रतिमा के पास और पीपल के पेड़ (रवी वृक्ष) के नीचे चार मुख वाला सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और शनि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

2. काले तिल, उड़द का दान

जरूरतमंद लोगों को काला तिल, काला कंबल, उड़द दाल या लोहे की वस्तुओं का दान करना शुभ फलदायी होता है।

3. हनुमान चालीसा का पाठ

शनि दोष से राहत पाने के लिए हनुमान जी की पूजा बेहद प्रभावी मानी जाती है। शनि जयंती पर हनुमान चालीसा पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।

4. पश्चिम दिशा का महत्व

पश्चिम दिशा को शनि की दिशा माना गया है। ऐसे में पूजा या मंत्र जाप करते समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करना शुभ होता है।

5. अच्छे कर्म

शनिदेव कर्मों के आधार पर न्याय करते हैं। इसलिए इस दिन झूठ, छल और गलत कार्यों से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए। ईमानदारी और अच्छे कर्मों से शनिदेव की कृपा बनी रहती है।

पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

शनि पूजा से पहले स्नान करके काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
शनिदेव की प्रतिमा के ठीक सामने खड़े होकर दर्शन करने की बजाय थोड़ा किनारे से दर्शन करना चाहिए।
शनि जयंती पर पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। पीपल के पेड़ की 7 परिक्रमा करने और सरसों तेल का दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद शनि पूजा शुभ होती है। संध्या काल में शनि की पूजा करना विशेष लाभकारी मानी गई है।

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