रांची। Ranchi के जगन्नाथपुर मंदिर से शुक्रवार को निकाली गई भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं और मान्यताओं की तर्ज पर आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को रांची में रथयात्रा का यह 334वां वर्ष है।
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Ranchi में रथयात्रा की परंपरा 1691 में प्रारंभ हुई थी। अपराह्न ढाई बजे भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं भाई बलभद्र के विग्रहों को रथ पर विराजमान किया गया और उनके शृंगार के बाद शाम पांच बजे रथयात्रा शुरू हुई तो विशाल मेला परिक्षेत्र स्वामी जगन्नाथ के जयकारे से गूंज उठा।
बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान का रथ खींचकर करीब आधा किलोमीटर दूर मौसीबाड़ी तक पहुंचाया। भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में ही दर्शन देंगे।
5 जुलाई को हरिशयनी एकादशी की तिथि में रथ यात्रा की वापसी होगी। 6 जुलाई को यहां लगे विशाल मेले का समापन होगा। अनुमान है कि रथयात्रा महोत्सव के पहले दिन करीब दो लाख लोग पहुंचे। Ranchi शहर के धुर्वा स्थित यह जगन्नाथपुर मंदिर सर्वधर्म और सर्वजाति समभाव के केंद्र के रूप में विख्यात रहा है।
Ranchi शहर के धुर्वा स्थित यह जगन्नाथपुर मंदिर सर्वधर्म और सर्वजाति समभाव के केंद्र के रूप में विख्यात रहा
इस मंदिर में पूजा से लेकर भोग चढ़ाने का विधि-विधान पुरी जगन्नाथ मंदिर जैसा ही है। गर्भ गृह के आगे भोग गृह है। भोग गृह के पहले गरुड़ मंदिर है, जहां बीच में गरुड़जी विराजमान हैं। गरुड़ मंदिर के आगे चौकीदार मंदिर है। ये चारों मंदिर एक साथ बने हुए हैं। मंदिर का निर्माण सुर्खी-चूना की सहायता से पत्थर के टुकड़ों द्वारा किया गया है तथा कार्निश एवं शिखर के निर्माण में पतली ईंट का भी प्रयोग किया गया है।

