अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

बरसात के मौसम में डेंगू से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार : डॉ. अमोल गुप्ता

On: July 1, 2026 7:29 PM
Follow Us:
---Advertisement---

बरसात के मौसम में डेंगू से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार : डॉ. अमोल गुप्ता

सहसवान।बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ डेंगू के मामलों में भी वृद्धि देखने को मिलती है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना और शुरुआती लक्षणों को पहचानना अत्यंत आवश्यक है।यह जानकारी डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल,सहसवान के सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक एवं जीर्ण व चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ.अमोल गुप्ता ने दी।

डॉ.गुप्ता ने बताया कि डेंगू एक वायरल रोग है, जो एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलता है।यह मच्छर प्रायः दिन के समय काटता है तथा घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनपता है।डेंगू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द,आंखों के पीछे दर्द, शरीर एवं जोड़ों में तीव्र पीड़ा, कमजोरी, त्वचा पर लाल चकत्ते तथा प्लेटलेट्स की संख्या में कमी शामिल हो सकती है।

उन्होंने कहा कि डेंगू से बचाव के लिए सबसे प्रभावी उपाय मच्छरों की रोकथाम है।घर,छत, कूलर, गमले, टायर, पानी की टंकियों एवं अन्य पात्रों में पानी जमा न होने दें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी एवं मच्छररोधी उपाय अपनाएं तथा आसपास स्वच्छता बनाए रखें।

डॉ.अमोल गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी में रोगी के लक्षणों, प्रकृति एवं संपूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन कर व्यक्तिगत आधार पर उपचार किया जाता है।डेंगू के रोगियों में होम्योपैथिक औषधियां बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी तथा रोग से उबरने की प्रक्रिया में सहायक हो सकती हैं।हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर डेंगू, अत्यधिक रक्तस्राव, लगातार उल्टी,सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी अथवा प्लेटलेट्स में तेज गिरावट जैसी स्थितियों में तुरंत अस्पताल में भर्ती होकर आवश्यक आधुनिक चिकित्सा लेना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की होम्योपैथिक औषधि केवल योग्य चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए।

हेल्थ फिटनेस व योग विशेषज्ञ के रूप में डॉ.गुप्ता ने कहा कि डेंगू के दौरान पर्याप्त आराम,पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, नारियल पानी, ओआरएस तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार संतुलित एवं सुपाच्य आहार लेना लाभदायक रहता है। पूर्ण स्वस्थ होने के बाद धीरे-धीरे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, गहरी श्वास अभ्यास तथा हल्के योगासन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार प्रारम्भ किए जा सकते हैं, जिससे शरीर की रिकवरी, फेफड़ों की कार्यक्षमता एवं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। तीव्र बुखार या कमजोरी के दौरान कठिन योगाभ्यास नहीं करना चाहिए।

डॉ. गुप्ता ने जनसामान्य से अपील की कि बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं।समय पर निदान, उचित उपचार एवं बचाव संबंधी उपाय अपनाकर डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी 

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply