हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। मंदिर प्रशासन ने जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक सख्त कदम उठाते हुए मंदिर परिसर में तैनात सभी पुजारियों, पंडितों और कर्मचारियों के लिए एक नया ‘ड्रेस कोड’ लागू कर दिया है। अब से मंदिर का पूरा स्टाफ ‘पॉकेटलेस’ (बिना जेब वाले) कपड़ों में ही अपनी सेवाएं देगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही है प्राथमिकता
सोमवार को श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने इस नई व्यवस्था का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों को बिना जेब वाले विशेष वस्त्र वितरित किए।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने स्पष्ट किया कि विश्वभर से श्रद्धालु मां मनसा देवी के दर्शन के लिए आते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ दान करते हैं। यह सुनिश्चित करना ट्रस्ट की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान सीधे मंदिर के दानपात्र (Trust Fund) में ही जाए। इसी पारदर्शिता को 100 प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए यह ‘पॉकेटलेस’ व्यवस्था लागू की गई है।
भक्तों ने की फैसले की सराहना
अक्सर कई बड़े मंदिरों में दान के पैसों को लेकर विवाद या अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा उठाए गए इस कदम की श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। ट्रस्ट का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल दान प्रक्रिया में सुधार होगा, बल्कि मंदिर की गरिमा और भक्तों का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।

