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Haridwar: संस्कृत उन्नयन के लिए राज्य में गठित होगा उच्चस्तरीय आयोग, सीएम धामी की घोषणा

On: December 2, 2025 11:24 AM
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सनातन संस्कृति के इतिहास और वैदिक काल को देखें तो समस्त वेदों, पुराणों और उपनिषदों की रचना संस्कृत में ही की गई है। संस्कृत भाषा अनादि और अनंत है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से संस्कृत अकादमी में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन पर मुख्यमंत्री ने संस्कृत के उत्थान और विकास के लिए उच्चस्तरीय आयोग के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के आधार पर ही प्राचीन मानव सभ्यताओं का विकास संभव हो सका और विश्व की अधिकतर भाषाओं की जड़ें किसी न किसी रूप में संस्कृत से ही जुड़ी हुई हैं।

Haridwar : संस्कृत की दिव्यता और वैश्विक विद्वानों की रुचि

 

सोमवार को सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः कहा कि समस्त वेद, पुराण और उपनिषद संस्कृत में ही रचे गए हैं और यह भाषा देववाणी मानी जाती है। 19वीं शताब्दी में जब विदेशी विद्वान भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित हुए, तो वे संस्कृत में सुरक्षित विशाल ज्ञान-संपदा को देखकर आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने पाया कि भारतीय ऋषि-परंपरा, वेद, उपनिषद, दर्शन, गणित, खगोल, साहित्य और व्याकरण जैसे विषयों का गहन ज्ञान संस्कृत में संचित है।

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Haridwar : संस्कृत को राज्य की पहचान बताने वाले वक्तव्य

 

पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने संस्कृत को द्वितीय राजभाषा घोषित किया है। देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही भारतीय ज्ञान परंपरा का एक ऊर्जामय एवं महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। संस्कृत के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। उन्होंने सभी संस्कृत प्रेमियों से संस्कृत के प्रचार-प्रसार में निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देने की अपील की। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला, विदेश मंत्रालय की सचिव डॉ. नीना मल्होत्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Haridwar : सीएम धामी ने साझा की अपनी संस्कृत यात्रा

 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्कूल के दिनों में कक्षा नौ तक संस्कृत पढ़ी है। उस समय सीखी गई श्लोक-पंक्तियां, व्याकरण के मूलभूत नियम और संस्कृत की मधुरता आज भी उन्हें प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि समय के अभाव के कारण अब अभ्यास कम हो पाया है, लेकिन संस्कृत के प्रति उनका प्रेम आज भी बना हुआ है। कार्यक्रम के दौरान सीएम धामी ने अपनी पढ़ाई के समय याद किए गए कुछ संस्कृत श्लोक भी सुनाए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा।

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