Amroha News -अमरोहा, जिलाधिकारी डॉ0 नितिन गौड़ ने बताया कि उ0प्र0 स्टाम्प (सम्पत्ति का मूल्यांकन) नियमावली, 1997 एवं उत्तर प्रदेश स्टाम्प (सम्पत्ति का मूल्यांकन) (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2013 तथा (तृतीय संशोधन) नियमावली-2015 के नियम-4 (1) के अन्तर्गत जनपद अमरोहा में अचल सम्पत्तियों के मूल्यांकन के लिए उप निबंधक कार्यालय अमरोहा, धनौरा, हसनपुर एवं नौगावां सादात हेतु अन्तिम रूप से संशोधित (पुनरीक्षित) मूल्यांकन दर सूची वर्ष 2026-27 को समस्त प्रावधानों सहित 11 सितंबर 2026 से प्रभावी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पुनरीक्षित सर्किल दरों में सामान्य ग्रामीण क्षेत्रों में 10 प्रतिशत, विकासशील क्षेत्रों में आवासीय एवं कृषि भूमि की दरों में 15 प्रतिशत, जबकि समस्त नगरीय, लघुत्तर नगरीय एवं अर्धनगरीय क्षेत्रों में आवासीय एवं कृषि भूमि की दरों में 20 प्रतिशत की वृद्धि प्रभावी की गई है। इसी प्रकार राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राज्यमार्ग पर स्थित ग्रामों में कृषि एवं अकृषिक भूमि की दरों में 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि जनहित को दृष्टिगत रखते हुए प्रभावी दर सूची में वृक्षों एवं निर्माण की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। सड़क, सेगमेन्ट तथा बहुमंजिला इमारतों के मूल्यांकन से संबंधित सामान्य निर्देश पूर्व वर्ष की भांति ही प्रभावी रहेंगे तथा इनमें कोई नया परिवर्तन नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के अन्तर्गत आने वाले सभी 52 राजस्व ग्रामों की प्रचलित दरों में अन्तर को कम करते हुए यथासंभव आस-पास के ग्रामों की दरों के समतुल्य करने का प्रयास किया गया है। इसके तहत परियोजना से आच्छादित ग्रामों में 5 प्रतिशत से लेकर 48 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। तहसील धनौरा के राजस्व ग्राम देहरा घनश्याम की प्रचलित दरें आस-पास के ग्रामों की तुलना में अत्यंत कम होने के कारण अन्तर को कम करने के लिए यहां की दर में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी प्रकार बल्दाना असगर अली में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि प्रभावी की गई है।
इसी प्रकार तहसील हसनपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के अन्तर्गत आने वाले ग्राम रूखालू, शकरौली एवं गुलामपुर की दरें आस-पास के ग्रामों की अपेक्षा काफी कम होने तथा विगत दो वर्षों में कोई वृद्धि न किए जाने के कारण इनकी दरों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि प्रभावी की गई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि आम किसानों की चिन्ताओं को दृष्टिगत रखते हुए पुनरीक्षित दरों को इस प्रकार संतुलित रखे जाने का प्रयास किया गया है कि उन्हें भविष्य में भूमि के क्रय-विक्रय पर अधिक स्टाम्प शुल्क एवं निबन्धन शुल्क का भार न पड़े।
उन्होंने बताया कि नवीन सर्किल रेट में की गई वृद्धि में मांग और आपूर्ति का संतुलन, इन्फ्रास्ट्रक्चरल वैल्यू एडिशन, बाजार मूल्य का संरेखण, स्पेशियल ग्रोथ एवं अर्बन स्पॉल तथा भविष्य की सम्भावनाओं का कैपिटलाइजेशन जैसे विभिन्न पहलुओं को दृष्टिगत रखा गया है।

