चंडीगढ़। अब तक आपने निश्चित रूप से “नमस्ते” और “हैलो” दोनों ही सुने होंगे लेकिन कल्पना कीजिए कि कैसा होगा जब Haryana के सरकारी स्कूलों के बच्चे अब आपको “बोनजोर” (हैलो) या “कमेंट का वा?” (आप कैसे हैं?) कहकर अभिवादन करेंगे? चौंकिए नहीं; यह हकीकत होने जा रही है। हरियाणा सरकार का लक्ष्य अपने स्कूलों में बच्चों को दुनिया की भाषा सिखाना है – फ्रेंच से शुरुआत करना – और सिर्फ किताबों तक ही सीमित नहीं।
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क्या फ्रेंच सीखने से खुलेगा ग्लोबल रास्ता?
सवाल वाजिब है: जब देश में इतनी सारी भाषाएं हैं, तो फ्रेंच क्यों? दरअसल, आज दुनिया वैश्वीकृत हो चुकी है। इन दिनों सिर्फ अंग्रेजी बोलना ही काफी नहीं है। भाषा की यह समझ भविष्य में उन बच्चों के लिए दरवाजे खोल सकती है जो विदेश में पढ़ना, काम करना या कारोबार करना चाहते हैं। दुनिया की उन भाषाओं में से फ्रेंच कई देशों में बोली और समझी जाती है। और यही वजह है कि Haryana प्रशासन अब युवाओं को किताबी ज्ञान के बजाय दुनिया से रूबरू कराना चाहता है।
फ्रेंच भाषा की शुरुआत होगी कहां से?
इसकी शुरुआत राज्य के मॉडल संस्कृति स्कूलों से होगी। नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को फ्रेंच भाषा की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए हरियाणा सरकार ने फ्रांस सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसका मतलब है कि जमीनी काम भी शुरू हो गया है, यह सिर्फ घोषणा नहीं है।
Haryana : भाषा के साथ संस्कृति सीखना क्यों ज़रूरी
यह कोर्स सिर्फ भाषा सिखाने से कहीं आगे जाएगा। छात्रों को फ्रांसीसी भोजन, संस्कृति, जीवन शैली, भाषा, कला और सोचने के तरीके के बारे में भी सिखाया जाएगा। यानी जब छात्र “बोनजोर” कहेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि इसके पीछे क्या भावना है। असली सीख भाषा के साथ-साथ विचारों को जानना है।

