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‘PoK खाली करे पाकिस्तान…’, विदेश मंत्रालय ने कहा- Jammu and Kashmir में अब कोई तीसरा पक्ष दखल न दे

On: May 14, 2025 11:15 AM
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Jammu and Kashmir
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नई दिल्ली- भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि Jammu and Kashmir से संबंधित सभी मुद्दों का समाधान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से किया जाना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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उन्होंने जोर देकर कहा कि लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना है। रणधीर जायसवाल ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारा लंबे समय से राष्ट्रीय रुख रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश Jammu and Kashmir से संबंधित किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान को द्विपक्षीय रूप से सुलझाना होगा।

इस नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। लंबित मामला पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना है।” उन्होंने कहा कि भारत द्वारा (पाकिस्तान और पीओके में) नष्ट किए गए आतंकवाद के बुनियादी ढांचे न केवल भारतीयों की मौत के लिए जिम्मेदार थे, बल्कि दुनिया भर में कई अन्य निर्दोष लोगों की मौत के लिए भी जिम्मेदार थे।

यह अब एक नई सामान्य बात है। पाकिस्तान जितनी जल्दी यह बात समझ ले, उतना ही बेहतर होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “कुछ दिन पहले आपने देखा कि सीसीएस के फैसले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया गया है। मैं आपको थोड़ा पीछे ले जाना चाहूंगा।

Jammu and Kashmir भारत द्वारा  नष्ट किए गए आतंकवाद के बुनियादी ढांचे निर्दोष लोगों की मौत के लिए भी जिम्मेदार थे

सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना पर टिकी हुई थी, जैसा कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है। पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर इन सिद्धांतों की अवहेलना की है। अब सीसीएस के फैसले के अनुसार, भारत संधि को तब तक स्थगित रखेगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्याग नहीं देता।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावे और संघर्ष विराम में व्यापार की भूमिका पर भी रणधीर जायसवाल ने बात की। उन्होंने कहा, “7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने से लेकर 10 मई को गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने पर सहमति बनने तक, भारतीय और अमेरिकी नेताओं के बीच उभरते सैन्य हालात पर बातचीत होती रही। इनमें से किसी भी चर्चा में व्यापार का मुद्दा नहीं उठा।”

 

 

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