Buduan News: कागजों में उलझा इंसाफ: मिलावटखोरों पर जुर्माने की रफ्तार सुस्त, सेहत से खिलवाड़ चुस्त
बदायूं। सरसों का तेल, देसी घी, सब्जियों के विभिन्न कंपनियों के मसाले, दूध, दही,आइसक्रीम, पनीर सहित कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें खूब मिलावट हो रही है।खास यह है कि मिलावट के शक में खाद्य पदार्थों के जो नमूने लखनऊ और झांसी प्रयोगशाला भेजे जाते हैं,वहां से खाद्य पदार्थों में मिलावट होने की पुष्टि होने के बावजूद इनकी स्थायी रोकथाम नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि बाजार में मिलावटी सामग्री खूब बिक रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई वाद दर्ज कराकर जुर्माना लगवाने तक ही सीमित है।
अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन की कोर्ट से चालू वित्तीय वर्ष में 200 से अधिक खाद्य पदार्थों के मामलों में सुनवाई की गई। इसके बाद प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई। कई मामलों की पड़ताल में सामने आया है कि जिन खाद्य पदार्थों के नमूने 2022 या 2023 में लिए गए थे, उनके नमूने जांच में अधोमानक मिलने पर खाद्य कारोबारियों पर सिर्फ जुर्माने की ही कार्रवाई की गई, जबकि इस बीच मिलावटी सामग्री लगातार बेची जाती रही।
खाद्य सुरक्षा विभाग जहां छापा मारता है, वहां संदेह पर उसी लॉट के पूरे माल को बेचने से रोकता है या सील कर देता है। खामी यह है कि कारोबारी के गोदाम में रखे उस कंपनी के अन्य स्टॉक या जिले की अन्य दुकानों पर रखे उसी माल की बिक्री पर तत्काल रोक नहीं लगाई जाती।सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सीएल यादव ने बताया कि मिलावट के शक में नमूने जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं,जांच रिपोर्ट मिलने पर वाद दर्ज फिर कोर्ट से जुर्माने की कार्रवाई होती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न खाद्य सामग्रियों के 234 नमूने लिए गए। 104 की रिपोर्ट आई।इसमें 50 सैंपल अधोमानक निकले। इन पर वाद दर्ज हैं।इस वित्तीय वर्ष में 95 से अधिक वाद कोर्ट में चल रहे हैं।158 मामलों में 38 लाख रुपये की जुर्माना राशि वसूली गई।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी

