भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज रात एक अहम प्रक्षेपण करने जा रहा है। नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को GSLV-F18 रॉकेट से रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। यह अगली पीढ़ी की NavIC सीरीज का तीसरा सैटेलाइट है।
क्यों खास है NVS-03
NVS-03 में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक लगी है और यह नया L1 सिग्नल लेकर जाएगा, जिससे नेविगेशन सेवाएं और सटीक व भरोसेमंद होंगी। खास बात यह है कि ISRO इसे अपने पायरो वाल्व पहले से खुले रखकर उड़ाएगा — एजेंसी के लिए यह पहली बार होगा। यह फैसला 2025 में NVS-02 के प्रोपल्शन फेलियर के बाद लिया गया है।
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NavIC को क्यों चाहिए नई जान
NavIC भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली है — अमेरिका के GPS की तरह, लेकिन पूरी तरह भारतीय नियंत्रण वाली। लेकिन एटॉमिक क्लॉक की खराबी, सैटेलाइटों के जीवनकाल की समाप्ति और असफल प्रतिस्थापनों (IRNSS-1H, NVS-02) के बाद इसने पोजिशनिंग डेटा देना बंद कर दिया था। NVS-03 का सफल प्रक्षेपण इस प्रणाली को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
श्रीहरिकोटा से उड़ान
प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा — यही वह प्रक्षेपण स्थल है जहां से भारत के लगभग सभी बड़े अंतरिक्ष मिशन उड़ान भरते हैं। GSLV-F18 इस मिशन के लिए चुना गया भारी प्रक्षेपण यान है, जो सैटेलाइट को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार कक्षा में स्थापित होने के बाद NVS-03 के सिग्नलों का परीक्षण किया जाएगा और फिर इसे NavIC नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
रात 11:51 बजे का प्रक्षेपण अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए खास पल होगा। सफल लॉन्च से भारत की आत्मनिर्भर नेविगेशन क्षमता मजबूत होगी, जिसका इस्तेमाल रक्षा, परिवहन, आपदा प्रबंधन और आम स्मार्टफोन नेविगेशन तक में होता है। प्रक्षेपण की लाइव स्ट्रीमिंग ISRO के आधिकारिक चैनलों पर देखी जा सकेगी।
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