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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: POCSO पीड़िता को चोट की रिपोर्ट के बिना भी मिलेगा ₹3 लाख मुआवजा

On: October 25, 2026 11:56 AM
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Allahabad High Court POCSO — इलाहाबाद हाईकोर्ट भवन का दृश्य
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि POCSO मामले में पीड़िता को चोट (इंजरी) की रिपोर्ट पेश न करने के आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मी बाई महिला एवं बाल सम्मान कोष नियमावली 2015 के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसके तहत चोट की रिपोर्ट न होने पर ₹3 लाख का मुआवजा रोका जा रहा था।

न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने कहा कि यह शर्त संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करती है। अदालत ने कहा कि FIR और चार्जशीट ही मुआवजे के लिए पर्याप्त आधार हैं। साथ ही, BNSS की धारा 184(7) के तहत मेडिकल जांच से इनकार करने पर भी पीड़िता के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।

यह आदेश ‘Victim X बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में 23 अक्टूबर को पारित हुआ, जिसकी जानकारी 24 अक्टूबर को सामने आई। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़िता को 10 दिन के भीतर ₹3 लाख का मुआवजा जारी किया जाए।

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