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बनबसा में पहली बार हुई uttarakhand कैबिनेट की बैठक, CM धामी ने कहा- सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचेगा शासन

On: October 4, 2026 8:05 PM
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Uttarakhand
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चम्पावत/बनबसा: uttarakhand में शासन को प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक नई पहल की है। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चम्पावत जिले के बनबसा में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। चम्पावत जिले में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। राज्य के अलग-अलग जनपदों में भी मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के सामने लाना है।

 

uttarakhandसीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा शासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शासन और जनता के बीच की दूरी को कम किया जाए और विकास योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचे। दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर समझकर उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं हैं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं। इसलिए सीमांत क्षेत्रों के विकास को राज्य सरकार प्राथमिकता दे रही है।

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uttarakhand रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि यहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिल सकें।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में कैबिनेट बैठक आयोजित करने से सरकार को क्षेत्र विशेष की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जन अपेक्षाओं को करीब से समझने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय जरूरतों से जुड़े विषयों पर त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने का रास्ता भी आसान होगा।

कैबिनेट मंत्रियों को भेंट की गई ‘फर्रा/छन्तोली’

बनबसा में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रिमंडल के सदस्यों को देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं की अनमोल धरोहर ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई।

यह चम्पावत के देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी पारंपरिक ढाल है। इसे स्थानीय लोक संस्कृति और परंपराओं में विशेष महत्व प्राप्त है।

बांस और रिंगाल से तैयार होती है पारंपरिक ढाल

बग्वाल परंपरा में इस्तेमाल होने वाली यह पारंपरिक ढाल मुख्य रूप से बांस अथवा रिंगाल की खपच्चियों से तैयार की जाती है। इसे छतरीनुमा आकार दिया जाता है, जिससे यह ढाल का स्वरूप लेती है।

मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट किया जाना चम्पावत की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत और सीमांत क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के सम्मान का प्रतीक रहा।

सीमांत जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

बनबसा में आयोजित इस कैबिनेट बैठक के जरिए राज्य सरकार ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड के सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, स्थानीय समस्याओं को स्थानीय स्तर पर समझने और उनके समाधान के लिए शासन की पहुंच को जिलों तक ले जाना जरूरी है।

चम्पावत में पहली बार हुई कैबिनेट बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

Aman Kumar Siddhu

He has 19 years of experience in journalism. Currently he is the Editor in Chief of Samar India Media Group. He lives in Amroha, Uttar Pradesh. For contact samarindia22@gmail.com

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