ग्रेटर नोएडा/अमरोहा, 29 सितंबर। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में अमरोहा के ग्रामीण हुनर और जैविक उत्पादों का डंका बज रहा है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल्स (निदेशालय और हॉल नंबर 12) पर प्रदर्शित प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ (ब्रांड का नाम: किसान वेदा) के उत्पादों को विदेशी व घरेलू बायर्स हाथों-हाथ ले रहे हैं। कभी गांव की चौखट से शुरू हुए इस सफर ने ट्रेड शो के मंच पर अंतरराष्ट्रीय मुकाम हासिल कर लिया है, जहां इटली, ओमान और नीदरलैंड की कंपनियों ने बड़े निर्यात सौदे (एमओयू) किए हैं। ट्रेड शो के शुरुआती चार दिनों के भीतर ही 30 से 35 बड़े संस्थागत खरीदारों ने संपर्क साधा है, जबकि 150 से अधिक आम उपभोक्ताओं ने स्टॉल का रुख कर लगभग 25 हजार की तत्काल नकद खरीदारी की है।
विदेशी बायर्स को भाया नीम-मोरिंगा शहद, इटली ने ₹2,000 प्रति किलो के भाव पर मांगी कुकीज
ट्रेड शो में पहुंचे विदेशी खरीदारों के बीच हितेश चौधरी के एफपीओ द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक शहद और मिलेट्स कुकीज की सबसे अधिक मांग रही। ओमान, जापान और नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडलों ने शहद के आयात के लिए आधिकारिक एमओयू किया है। नीदरलैंड के बायर्स ने टन के हिसाब से बल्क सप्लाई की मांग रखी है, जबकि शुरुआत में 1,000 से 1,500 बोतलों के पहले बैच पर सहमति बनी है। वहीं, इटली के खरीदारों ने ज्वार व रागी से बनी कुकीज के लिए अनुबंध किया है, जिसके लिए ₹1,600 से ₹2,000 प्रति किलो के भाव पर समझौता हुआ है। विदेशी प्रतिनिधियों ने स्टॉल पर उत्पादों का स्वाद चखने के बाद निजी उपयोग के लिए भी डिब्बे खरीदे और अपनी तय गुणवत्ता व कस्टमाइज्ड पैकेजिंग मानकों के तहत माल मंगाने का फैसला लिया। एफपीओ के सभी उत्पाद एपीडा और पीजीएस द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रमाणित हैं।
घरेलू कंपनियों व स्थानीय खरीदारों में भी होड़, बी2बी स्तर पर मिले अग्रिम ऑर्डर
ट्रेड शो के बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) और बी2सी सत्रों में स्थानीय कारोबारियों ने भी खासा उत्साह दिखाया है। बागपत के प्रमुख एफपीओ और ‘डॉक्टर मोरिंगा’ सहित करीब 10 से 15 घरेलू कंपनियों व एफपीओ ने उत्पादों की आपूर्ति के लिए बातचीत पूरी कर ली है। इसके अलावा, नोएडा और दिल्ली-एनसीआर से पहुंचे परिवारों ने बड़ी संख्या में स्टॉल पर आकर खरीदारी की। पहले दिन उत्पाद ले जाने वाले कई ग्राहकों ने शानदार फीडबैक देते हुए दोबारा बड़े ऑर्डर देने और स्थानीय स्तर पर डिलीवरी की मांग रखी है। ट्रेड शो के मंच से मिले इस भारी रिस्पॉन्स के बाद अब आगामी दीपावली के लिए भी कॉर्पोरेट व घरेलू स्तर से अग्रिम ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
कमल ककड़ी का अचार और लेमनग्रास उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी में आने वाले खरीदारों के लिए एफपीओ के नवाचारी उत्पाद सबसे बड़ा आकर्षण रहे। सब्जी के रूप में खाई जाने वाली कमल ककड़ी का अचार, करौंदे, आंवले और लहसुन के पारंपरिक अचार को खरीदारों ने खूब पसंद किया। वहीं, दूध से 10 गुना अधिक कैल्शियम वाले मोरिंगा पाउडर, नीम शहद, मिलेट्स नमकीन, मल्टीग्रेन आटा तथा लेमनग्रास से तैयार टी, ऑयल, हैंड सैनिटाइजर और फिनाइल की भी जमकर बिक्री हुई। पूरी तरह से हैंडमेड और केमिकल-मुक्त होने के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहरी उपभोक्ताओं ने इन उत्पादों को प्राथमिकता दी।
120 हेक्टेयर में ताइवान पिंक अमरूद और मल्टी क्रॉपिंग का मॉडल
ट्रेड शो में पहुंचीं हितेश चौधरी ने बताया कि इन उत्पादों के पीछे 3,000 किसानों और 1,000 ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत जुड़ी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में बदलाव लाते हुए उन्होंने कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे लाकर 120 हेक्टेयर में ‘एडवांस ताइवान पिंक अमरूद’ की खेती कराई। किसानों की आमदनी सुनिश्चित करने के लिए गन्ने के साथ अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और मिलेट्स (रागी, ज्वार) की मल्टी क्रॉपिंग कराई जाती है। बाजार में बिचौलियों से बचाने के लिए एफपीओ खुद खरीददार बनता है—जैसे रागी का बाजार भाव यदि ₹60 प्रति किलो है, तो एफपीओ किसानों से ₹63 में खरीदता है।
शुरुआती दौर में पशुओं को खिलाए उत्पाद, अब सालाना ₹50 लाख का कारोबार
ट्रेड शो में मिली यह कामयाबी संघर्षों की भट्टी में तपकर निकली है। एफपीओ शुरू करने से पहले हितेश एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका थीं और बच्चों को योगा सिखाती थीं। वर्ष 2020 में उन्होंने एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूह बनाया और गन्ने की सिंगल बड चिप नर्सरी व गाय के गोबर के दीपक बनाने शुरू किए। 17 अप्रैल 2021 को उन्होंने बिना किसी बाहरी सरकारी फंड के निजी एफपीओ की स्थापना की। शुरुआत में जब 10-10 पैकेट बनाकर बेचे जाते थे और बाजार नहीं मिलता था, तो तैयार माल मवेशियों को खिलाना पड़ता था। लोगों के तानों के बावजूद उन्होंने काम जारी रखा। आज उसी मेहनत के दम पर एफपीओ का वार्षिक टर्नओवर ₹50 लाख पहुंच चुका है (जिससे उनकी व्यक्तिगत आय ₹10-11 लाख है) और इस वित्तीय वर्ष में ₹1 करोड़ का टर्नओवर पार करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी मंचों से मिला संबल, अब मोरिंगा बर्फी और हल्दी अचार की तैयारी
कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत बने क्लस्टरों के माध्यम से हितेश किसानों व सखियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देती रही हैं। ट्रेड शो में मिली वैश्विक पहचान के बाद अब वह मोरिंगा के लड्डू, मोरिंगा की बर्फी और कस्तूरी, काली व सुगंधा हल्दी के साथ हल्दी का विशेष अचार लॉन्च करने जा रही हैं। डिजिटल दौर के अनुरूप ‘किसान वेदा’ नाम से वेबसाइट, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब चैनल के जरिए भी ई-कॉमर्स विस्तार किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री द्वारा सराही जा चुकीं हितेश चौधरी का यह सफर ट्रेड शो के माध्यम से अब वैश्विक उड़ान भर रहा है।
वर्जन
यह सब सरकार के सहयोग की ही देन है कि आज हम जैसे साधारण लोग इस अंतरराष्ट्रीय मुकाम पर पहुंचे हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हमारे एफपीओ के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। यहां कृषि विभाग के माध्यम से हमें स्टॉल मिला, जिसने सीधे विदेशी खरीदारों तक हमारी पहुंच बना दी। पहले जहां हम 10-10 पैकेट बेचने के लिए संघर्ष करते थे, आज उसी मेहनत को इस मंच पर इटली, ओमान, जापान और नीदरलैंड जैसे देशों के निर्यातकों ने पहचाना है। शहद और कुकीज के लिए हुए एमओयू और टनों में मिले ऑर्डर्स इस बात का सबूत हैं कि अगर ग्रामीण महिलाओं और किसानों को सही मंच मिले, तो वे दुनिया के बड़े बाजारों में भी अपनी धाक जमा सकते हैं।”
— हितेश चौधरी, संस्थापक, प्रखंड बायो एनर्जी एफपीओ (किसान वेदा)

