Saharanpur: यूपी के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में एक मस्जिद को गिराया गया था, जिसके मलबे के नीचे एक कुआं मिला है. अधिकारियों ने इस धर्मस्थल को अवैध बताया था. मलबे को हटाने के बाद कुआं सामने आया, जिससे ये सवाल उठने लगे कि इसे कब बनाया गया था और इसके ऊपर मस्जिद कैसे बनी. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद कुएं के ऊपर बनी हुई थी. अधिकारियों ने अब कुएं को ढक दिया है और इसके इतिहास और हालात का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है.
कुएं के इतिहास पर सवाल
कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं, जैसे कि कुआं किसने और कब बनवाया था. अधिकारी ये भी जांच कर रहे हैं कि क्या मस्जिद बनने से पहले कुआं मौजूद था और बाद में उस ढांचे के नीचे आ गया. सहारनपुर सदर के एसडीएम सुबोध कुमार, जिन्होंने मौके का निरीक्षण किया, उन्होंने कहा कि प्रशासन को पता था कि मस्जिद कुएं के ऊपर बनी थी. हालांकि उन्होंने कहा कि अधिकारियों के पास अभी कुएं के ऑरिजिन या उसके बनने की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं है. SDM ने कहा कि प्रशासन मामले की जांच करेगा और तथ्यों का पता लगाने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा.
आखिर मस्जिद क्यों गिराई गई?
सहारनपुर की इस मस्जिद से जुड़ा कानूनी विवाद 2025 का है, जब बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि मस्जिद अवैध है. कार्रवाई के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई, 2026 को मस्जिद के खिलाफ फैसला सुनाया और उसे हटाने का आदेश दिया. मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी ने जिला अदालत में इस फैसले को चुनौती दी. तकरीबन डेढ़ महीने की सुनवाई के बाद, जिला न्यायाधीश ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा और मामले में दखल देने से इनकार कर दिया.
कड़ी सुरक्षा में हुई कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन ने कहा कि तोड़फोड़ की कार्रवाई तय कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई. इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी की पांच बटालियन और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. हालांकि इसको लेकर राज्य में सियासत भी तेज हो गई है. मस्जिद गिराए जाने के मद्देनजर समाजवादी पार्टी की सांसद को घर ही में नजरबंद कर दिया गया था. वहीं अखिलेश यादव ने प्रशासन के इस कदम की जमकर आलोचना की और योगी सरकार पर जुबानी हमला बोला है.

